Chhattisgarh Assembly Election 2023 : असंतुष्टों के कदमों के डर से दलों ने प्रत्याशी सूची रोकी .. !
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Chhattisgarh Assembly Election 2023 : करीब आधा दर्जन राजनैतिक दल चुनाव मैदान में आने कमर कस रहे हैं। पर अब तक किसी दल ने प्रत्याशी की नाम की घोषणा नहीं की
Chhattisgarh Assembly Election 2023 : रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अंदाजा है Chhattisgarh Assembly Election 2023 कि 10 अक्टूबर तक चुनाव आचार संहिता लग सकती है। करीब आधा दर्जन राजनैतिक दल चुनाव मैदान में आने कमर कस रहे हैं। पर अब तक किसी दल ने प्रत्याशी घोषणा के तौर पर एक चौथाई नाम भी घोषित नहीं किए हैं। कुछ ने तो खाता तक नहीं खोला है। कहां जा रहा है कि टूट-फूट की आशंका को लेकर पार्टिया सहमी है। वे एहतियात बरत रही हैं।

प्रदेश में राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ने लगी
प्रदेश में राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। जिसमें नित्य इजाफा हो रहा है। दो प्रमुख दल भाजपा -कांग्रेस के मध्य सीधी टक्कर मानी जा रही है। वैसे भी छत्तीसगढ़िया संस्कृति आर या पार की रही है। यानी या तो भाजपा या कांग्रेस। अब यह दीगर बात है कि चार अन्य पार्टिया भी किस्मत आजमाने मैदान में कूद पड़ी है। जिनमें बसपा, छत्तीसगढ़ जोगी कांग्रेस, पहले से है। वे चुनाव लड़ चुकी हैं। उनके विधायक भी हैं। जबकि आम आदमी पार्टी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हाल ही में कांग्रेस अलग हुए अरविंद नेताम की नवनिर्मित पार्टी -“हमर राज” दोनों पहली दफा यहां चुनाव मैदान में उतर रही हैं।
उधर बसपा ने कुछ नाम घोषित कर दिए हैं तो वही आम आदमी पार्टी ने भी। छत्तीसगढ़ जोगी कांग्रेस करने वाली है। भाजपा ने 22 नामों की घोषणा माह भर पूर्व करके भूचाल ला दिया था। कांग्रेस ने अभी पत्ता खोलना शुरू नहीं किया है। वही नेताम की पार्टी चुनाव आयोग से हरी झंडी मिलते ही प्रत्याशी घोषित करेगी।
चर्चा है कि प्रत्याशी सूची लगभग तय हो चुकी है।
माना जा रहा है कि 10-15 अक्टूबर तक ज्यादातर नामो की घोषणा तमाम दल कर देंगे। पर अंदर चर्चा है कि प्रत्याशी सूची लगभग तय हो चुकी है। उम्मीदवारों को इशारा-संकेत कर दिया गया है पर बस घोषणा रह गई है। टिकट से वंचित रहे जाने वाले भावी असंतुष्ट नेता कहीं छोटा- मंझोला समूह बनाकर पार्टी से अलग न हो जाए इस डर से सत्ता-पक्ष हो या विपक्ष या दीगर पार्टिया पूरी लिस्ट जारी नहीं कर रही है। वे ऐन वक्त पर फाइनल लिस्ट जारी करेंगी पर तब तक असंतुष्ट को पार्टी बदलने या टूट फूट करने में देरी हो चुकी होगी। वे चाहकर भी पार्टी को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पायेगे इसी सोच के साथ पार्टिया सूची जारी करने में देर कर रही हैं। बावजूद वे क्या-कुछ अख्तियार करते हैं यह देखना दिलचस्प होगा।
गौरतलब है कि दोनों प्रमुख दलों में, जिनमें छत्तीसगढ़िया समाज को किसी एक को (अपवाद छोड़ दें यानी अन्य दल भी) का चुनाव करना है। उन दोनों पार्टियों में दर्जनों युवा अधेड़वस्था की ओर बढ़ने लगे हैं। वे 20-25 वर्षों से कुछ 30 वर्षों से इंतजारत हैं। उनमें कुछ कर गुजरने, कर दिखाने की क्षमता है पर अवसर तो पार्टी ही देती है। लंबे अरसे बतौर कार्यकर्ता (सिपाही) कार्य करने, व्यापक अनुभव रखने परंतु जूनियर को टिकट मिलने से नाराजगी खींझ होना स्वाभाविक है। ऐसे में व्यक्ति का मन खट्टा हो जाता है और स्वाभिमान अगर जाग गया तो निर्णय लेते देरी नहीं लगती। लिहाजा टूट-फूट की आशंका बरकरार रहेगी। नहीं तो चुनाव के दौरान भीतर घात होगा। खैर ! इन सबमें थोड़ा वक्त है। पर नहीं (टूट-फुट या भीतरघात ) होगा यह दावा कोई नहीं कर सकता। आखिर एक अनार- सौ बीमार वाली उक्ति है। टिकट वास्ते साम- दंड भेद राजनीति में चलना आम बात है। इंतजार करें।
(लेखक डॉ. विजय)


