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Chhattisgarh News : RTE ड्रॉपआउट बच्चों की जानकारी जुटाएगी सरकार, प्रदेश में रायपुर और कोरबा जिले में सर्वाधिक बच्चे स्कूल छोड़ रहे

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Chhattisgarh News: रायपुर और कोरबा जिले में निजी स्कूल प्रबंधकों की मनमानी और समान मॉनिटरिंग के अभाव के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अन्य जिलों की तुलना में अधिक होने का अनुमान है।

Chhattisgarh News रायपुर। रायपुर व कोरबा जिले में मॉनिटरिंग बराबर न होने तथा निजी स्कूल प्रबंधकों की मनमानी के चलते पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अन्य जिलों से ज्यादा आंकी जा रही है। अब जिलाधीशों की अध्यक्षता में जिलेवार स्तरीय कमेटी के साथ ही मेंटर नियुक्त किया गया है।

बताया जा रहा है कि शिक्षा सत्र 2022-23 में ही रायपुर जिले से 2496 बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। ये सभी बच्चे RTE के तहत दाखिला पाए थे। गौरतलब हो कि RTE के अंतर्गत निजी स्कूलों में एंट्री पॉइंट कक्षाओं में बीपीएल और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती है। जिसमें हर साल लॉटरी के माध्यम से बच्चों का चयन किया जाता है। इस वक्त पूरे प्रदेश में 6684 निजी स्कूलों में आरटीई की 57785 सीटें है। चालू शिक्षा सत्र में उक्त सीटों के लिए एक लाख आवेदन आए थे। जिसमें से 42 हजार 53 बच्चों का चयन लाटरी पद्धति से हुआ है।

जिस तरह RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश हेतु आवेदकों की संख्या बढ़ रही है उसी तरह बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों का ग्राफ चढ़ रहा है। पिछले 3 शिक्षा सत्रों (वर्षो)की बात करें तो पूरे प्रदेश में 53 हजार से ज्यादा बच्चों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी। वर्ष 2022-23 में ही 24 हजार 478 बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी थी, जो चिंतनीय पहलू है।

इस क्रम में 21-22 में 18 हजार 399 तथा 20-21 में 10 हजार 427 बच्चों ने स्कूल छोड़ा। यह आंकड़े स्वयं शिक्षा विभाग के हैं, जो स्पष्ट करते हैं कि ड्राफ्ट आउट (छोड़ने) की संख्या बढ़ते जा रही है। पूरे प्रदेश में ततसंदर्भ में रायपुर, कोरबा जिले आगे चल रहे हैं। रायपुर जिले में 3 वर्षो में 4 हजार 868 तथा कोरबा जिले में 4 हजार 462, बिलासपुर जिले में 3 हजार 659, राजनांदगांव जिले में 3 हजार 614, दुर्ग जिले में 3 हजार 12, बलोदा बाजार जिले में 2 हजार 488 बच्चों ने स्कूल छोड़ा।

हालांकि अब उपरोक्त स्थिति को स्कूल शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। RTEके प्रभावी क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग के लिए विभाग द्वारा योजना बनाई गई है। प्रत्येक जिले में जिलाधीशों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की गई है जिसमें एसपी और निगम आयुक्त को भी शामिल किया गया है। इसी तरह प्रत्येक स्कूल में मेंटर की नियुक्ति की जाएगी। मेंटर स्कूल प्रबंधन और पलकों के मध्य ततसंबंध में समन्वय स्थापित कर समाधान तलाशेंगे। हालांकि, आरोप है कि RTE के तहत आने वाले बच्चों को एडमिशन दे दिया गया। बच्चे स्कूल के माहौल में ढल न पाने और पाठ्यपुस्तकों, यूनिफॉर्म और अन्य गतिविधियों के लिए भारी फीस वसूले जाने से नाखुश रहते हैं पालक, इसलिए स्कूल प्रबंधन उनके बच्चों को निकाल देता है।

(लेखक डा. विजय)

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