PFI को बड़ी राहत, NIA कोर्ट ने 6 और संपत्ति की कुर्की रद्द की, जानें मामला

NIA की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कथित रूप से जुड़ी 17 संपत्तियों और एक बैंक खाते की कुर्की के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने पाया कि ट्रस्ट सदस्यों की PFI की गतिविधियों में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं हुई. यह फैसला जून में NIA द्वारा की गई 10 अन्य संपत्तियों की जब्ती के बाद आया है. आवेदकों ने संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA की स्पेशल कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से कथित रूप से संबंधित छह संपत्तियों और एक बैंक खाते की कुर्की के आदेश को रद्द कर दिया है. इससे पहले इसी साल जून के महीने में एजेंसी ने PFI की 10 अन्य संपत्तियों को जब्त किया था. एनआईए ने पीएफआई के खिलाफ देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता और वर्ष 2022 में केरल के पलक्कड़ जिले में RSS नेता श्रीनिवासन की हत्या के सिलसिले में मामला दर्ज किया था. इसी के तहत विभिन्न संपत्तियों और बैंक खातों को कुर्क किया गया था.
NIA की कोर्ट ने इस महीने 6 अलग-अलग फैसले दिए, जिसके मुताबिक जारी की जाने वाली संपत्तियां और बैंक खाते कई संस्थाओं से संबंधित हैं, जैसे कि त्रिवेंद्रम एजुकेशन ट्रस्ट, हरिथम फाउंडेशन पूवंचिरा, पेरियार वैली चैरिटेबल ट्रस्ट अलुवा, वल्लवुनाड ट्रस्ट पलक्कड़, कासरगोड में चंद्रगिरी चैरिटेबल ट्रस्ट और नई दिल्ली में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई). जांच के दौरान NIA ने दावा किया है कि PFI पेरियार घाटी परिसर और वल्लुवनाड हाउस में हथियारों की ट्रेनिंग दे रहा था.
NIA की कोर्ट का फैसला: PFI संपत्ति कुर्की रद्द
इस साल जून के अंदर कोर्ट ने मलप्पुरम, अलप्पुझा, कोल्लम, पथानामथिट्टा, त्रिशूर, वायनाड, कोझिकोड, पलक्कड़ और एर्नाकुलम में PFI से जुड़ी माने जाने वाली 10 ट्रस्टों और व्यक्तिगत संपत्तियों की कुर्की रद्द कर दी. ये संपत्तियां विभिन्न ट्रस्टों और व्यक्तिगत मालिकों से संबंधित थीं. ट्रस्टियों और संपत्ति मालिकों के एक ग्रुप ने NIA की कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसमें उन्होंने 2023 में गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त प्राधिकारी की तरफ से PFI के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद शुरू की गई कुर्की को चुनौती दी थी.
PFI से जुड़े ट्रस्ट और व्यक्ति
NIA ने अब तक PFI केस में 63 व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए हैं. ट्रस्ट के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों ने दावा किया है कि वो एनआईए की जांच में शामिल नहीं थे और उनका पीएफआई से किसी भी तरह का सीधा संबंध नहीं था. एनआईए ने कोर्ट को बताया कि इन संपत्तियों का उपयोग पीएफआई कैडर को फीजिकल और हथियार ट्रेनिंग देने और आश्रय देने के लिए किया गया था. कोर्ट ने संपत्तियों की कुर्की रद्द कर दी क्योंकि उसने पाया कि ट्रस्ट के सदस्यों की पीएफआई की गतिविधियों में सीधे तौर पर संलिप्तता सिद्ध नहीं हो सकी.
17 कुर्कियों को रद्द कर दिया
आवेदकों के वकील पीसी नौशाद ने कहा कि पीएफआई मामले में कुर्क की गई 17 संपत्तियों को कोर्ट ने रद्द कर दिया है. उन्होंने बताया कि एनआईए को पता चला था कि नई दिल्ली स्थित एसडीपीआई के बैंक खाते से पीएफआई मामले के एक आरोपी को धनराशि ट्रांसफर की गई थी, जिसके बाद उस खाते को जब्त कर लिया गया था. हमने कोर्ट को यह जानकारी दी कि आरोपी ड्राइवर का काम करता था. और उसे महीने में वेतन के रूप में पैसे भेजे जाते थे. जानकारी के मुताबिक अब तक अदालत ने पीएफआई मामले में की गई 17 कुर्कियों को रद्द कर दिया है. आवेदकों ने संबंधित प्राधिकारियों से सम्पर्क कर इन संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.