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अमित जोगी जग्गी मर्डर केस में दोषी करार, हाई कोर्ट से लगा बड़ा झटका

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी ने जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।

 

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने पूर्व विधायक अमित जोगी को राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी ठहराया है। यह मामला साल 2003 का है। 2003 में रायपुर में व्यवसायी-राजनेता राम अवतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी, उस समय अजीत जोगी राज्य के मुख्यमंत्री थे।

तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करें अमित जोगीः कोर्ट

इस मामले में 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 लोगों को दोषी ठहराया था। हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। सीबीआई ने अमित जोगी को बरी करने के फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसे देरी के आधार पर रद्द कर दिया गया था। बाद में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद देरी को माफ करते हुए मामला पिछले नवंबर में हाई कोर्ट को सौंप दिया गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने 2 मार्च 2026 को अमित जोगी को दोषी ठहराया और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट के फैसले पर क्या बोले अमित जोगी

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए अमित जोगी ने कहा कि हाई कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार कर ली है, लेकिन मुझे इसमें सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था, उसे बिना उसकी एक भी बात सुने सज़ा देना ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों के खिलाफ है।” उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बावजूद उन्हें न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है। मेरे साथ घोर अन्याय हुआ है। निचली अदालत ने मुझे सुनवाई का मौका दिया था लेकिन हाई कोर्ट में मुझे बोलने का मौका भी नहीं दिया गया। जोगी ने यह भी बताया कि उनका मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उन्हें वहां निष्पक्ष सुनवाई मिलने का पूरा भरोसा है।

जोगी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद उन्हें बरी कर दिया था, जबकि हाई कोर्ट ने बहुत कम समय में ही कार्यवाही पूरी कर ली। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट में सुनवाई सिर्फ चार दिनों में पूरी हो गई। उनके अनुसार, इस मामले में CBI की अपील लगभग 12,000 पन्नों की है, जिससे इतने कम समय में मामले का अध्ययन करना और प्रभावी ढंग से बहस करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त समय का अनुरोध करने के बावजूद, उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।

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