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IT जॉब छोड़ बने आंदोलनकारी: जानिए कौन हैं अजिंक्य शिंदे, जिन्हें दीपके ने सौंपी CJP की बागडोर

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया के विरोध में राजधानी दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का नेतृत्व बदल गया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान के भीतर से संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद, अब आंदोलन का मोर्चा अजिंक्य शिंदे संभालेंगे। हिरासत की आशंका को भांपते हुए दीपके ने शुक्रवार को ही विमान के भीतर एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अनुपस्थिति में अजिंक्य शिंदे ही जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करेंगे।

दिल्ली आते ही शीर्ष नेता हिरासत में, शिंदे ने दोहराईं मांगें

शनिवार को राजधानी में प्रस्तावित आंदोलन के लिए पहुंचे CJP के तीन प्रमुख चेहरों अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद अजिंक्य शिंदे ने संगठन की तरफ से कमान संभालते हुए अपनी मुख्य मांगों पर अड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और आपराधिक कार्रवाई की मांग दोहराई। साथ ही, 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त करने की बात कही।

कंप्यूटर इंजीनियर से कोर टीम तक का सफर

महाराष्ट्र के लातूर के निवासी 35 वर्षीय अजिंक्य शिंदे ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है। पढ़ाई के बाद उन्होंने पुणे की एक प्रमुख आईटी कंपनी में कई सालों तक अच्छे पैकेज पर नौकरी की, जिसे छोड़कर वे सामाजिक अभियानों में कूद पड़े। सोशल मीडिया पर भी उनकी मजबूत सक्रियता है, जहां इंस्टाग्राम पर उनके 23 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। अतीत में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे शिंदे के नाम से फेसबुक पेज भी मौजूद है, हालांकि 2024 के बाद से वह पेज निष्क्रिय है।

जमीनी अभियानों से बनाई पहचान

अजिंक्य शिंदे पार्टी की नींव रखे जाने के समय से ही इसके साथ जुड़े रहे हैं। वे नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में शामिल होकर कोर टीम का हिस्सा बने थे। इसके बाद देशभर के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए चलाए गए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का उन्होंने नेतृत्व किया। अगस्त में उन्हें संगठन का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया था और मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शन के आयोजन में भी उनकी केंद्रीय भूमिका थी। गांधी जयंती पर मुंबई के दादर में गैर-कानूनी जमावड़े और नारेबाजी के आरोप में जिन नेताओं पर मामला दर्ज हुआ था, उनमें दीपके के साथ शिंदे का नाम भी शामिल था।

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