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उमर खालिद का नाम लेकर अभिजीत दिपके का विवादित बयान, जंतर-मंतर आंदोलन के बीच बढ़ा सियासी विवाद

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक इंटरव्यू में उमर खालिद का नाम लेकर विवादित टिप्पणी की। बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई।

 

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने दिल्ली दंगा मामले के आरोपी उमर खालिद का नाम लेते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और राजनीतिक हलकों में भी इस पर बहस शुरू हो गई है।

 

इंटरव्यू के दौरान अभिजीत दिपके ने कहा, “अगर मैं उमर खालिद होता या मुसलमान होता, तो अब तक जेल में होता। इसकी मुझे अवेयरनेस है।” उनके इस बयान को लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने इसे सरकार पर निशाना बताया, जबकि अन्य ने इसे विवादित और आपत्तिजनक करार दिया।

 

गौरतलब है कि अभिजीत दिपके इन दिनों केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आंदोलन NEET पेपर लीक, NTA में कथित अनियमितताओं और SSC परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का भी समर्थन प्राप्त है। प्रदर्शन में उन छात्रों के परिजन भी शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने कथित परीक्षा विवादों के बाद आत्महत्या की थी।

 

अपने बयान के अलावा अभिजीत दिपके ने छात्रों की आत्महत्या के मामलों को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, उनके प्रति सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उनका कहना था कि सरकार के प्रतिनिधियों को पीड़ित परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी।

 

दिपके ने दीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल जैसे छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परिवार आज भी न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित परिवारों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और सरकार की ओर से उनसे संपर्क तक नहीं किया गया।

 

उधर, उमर खालिद दिल्ली दंगा मामले में आरोपी हैं और लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें अब तक नियमित जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई अदालत में जारी है।

 

अभिजीत दिपके के इस बयान को लेकर अभी तक संबंधित सरकारी पक्ष या अन्य संबंधित व्यक्तियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

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