छत्तीसगढ़ के 82 लाख परिवारों को बड़ी राहत, सरकार ने जारी किए निर्देश
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राज्य के 82 लाख राशनकार्डधारियों को फरवरी 2026 में ही दो महीने का चावल एकमुश्त दिया जाएगा। फरवरी माह में ही मा …और पढ़ें
रायपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राज्य के 82 लाख राशनकार्डधारियों को फरवरी 2026 में ही दो महीने का चावल एकमुश्त दिया जाएगा। फरवरी माह में ही मार्च का भी वितरण किया जाएगा। सभी कलेक्टरों और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था समय पर और सुचारू रूप से सुनिश्चित की जाए।
राज्य योजना के अंतर्गत आने वाले अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित और निःशक्तजन राशनकार्डधारियों को फरवरी में ही दो माह (फरवरी और मार्च) की पात्रता के अनुसार सामान्य (नानफोर्टिफाइड) चावल दिया जाएगा। यह आबंटन एकमुश्त जारी किया गया है, इसलिए दुकानों में पर्याप्त भंडारण करने को कहा गया है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता राशनकार्डधारियों को उनकी निर्धारित मासिक पात्रता के अनुसार फोर्टिफाइड राइस दिया जाएगा। इन हितग्राहियों के लिए फरवरी माह का नियमित आबंटन जारी किया गया है।
नमक, शक्कर और गुड़ भी मिलेगा
सामान्य एपीएल राशनकार्डधारियों के लिए भी फरवरी का मासिक चावल आबंटन जारी किया गया है, जिसे निर्धारित मात्रा अनुसार वितरित किया जाएगा। चावल के अलावा नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी फरवरी के लिए जारी किया गया है। संबंधित उचित मूल्य दुकानों को निर्देशित किया गया है कि सभी सामग्रियों का वितरण आबंटन के अनुसार ही किया जाए।
ई-पास से होगा बायोमेट्रिक सत्यापन
हितग्राहियों को राशन उठाव के लिए ई-पास मशीन में पृथक-पृथक बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करना होगा। इसके लिए एईपीडीएस साफ्टवेयर में आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने दुकानदारों को इसकी जानकारी पहले से देने को कहा है, ताकि वितरण के समय परेशानी न हो।
मीलिंग धीमी, चावल के स्टाक में आएगी परेशानी
प्रदेश में 15 नवंबर 2025 से धान खरीदी शुरू होने के बावजूद 31 जनवरी 2026 तक राइस मिलर्स से चावल उठाव नहीं करने की स्थिति ने मिलिंग उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। 75 दिन तक मिलिंग पूरी रफ्तार से नहीं होने से श्रमिकों, उद्योग और आपूर्ति तंत्र पर व्यापक असर की आशंका जताई जा रही है।
मिलर्स का कहना है कि जब तक वे उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत चावल सरकार को नहीं देते, तब तक खुले बाजार में बिक्री की अनुमति नहीं होती। लेकिन सरकारी उठाव की रफ्तार धीमी रहने से स्टाक फंसा हुआ है और पूंजी चक्र रुक गया है। असर मिल संचालन पर पड़ा है।
15 नवंबर 2025 से धान खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन 31 जनवरी तक राइस मिलों से अपेक्षित मात्रा में चावल का उठाव नहीं हो पाया। मिलिंग प्रभावित होने से मजदूर, हमाल, ट्रांसपोर्टर और अन्य कर्मचारियों को नियमित काम नहीं मिल पा रहा है। उद्योग जगत के अनुसार प्रदेशभर में करीब 50 हजार मजदूरों की आजीविका पर असर पड़ा है। कई मिलों में शिफ्ट कम कर दी गई है, जिससे मजदूरों की आय घट गई है और उनके परिवार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
मिलर्स बोले, नमी और नियम भी बाधा
मिलर्स का कहना है कि धान में नमी की मात्रा अधिक होने से चावल की रिकवरी कम हो रही है। वहीं नियम के अनुसार पहले 50 प्रतिशत चावल सरकार को देना अनिवार्य होता है, उसके बाद ही खुले बाजार में बिक्री संभव है। उठाव की रफ्तार धीमी होने से पूंजी चक्र प्रभावित हुआ है और कई मिलों को अस्थायी रूप से संचालन सीमित करना पड़ा है।
अधिकारियों का क्या कहना है
भूपेंद्र मिश्रा, नियंत्रक, खाद्य विभाग रायपुर का कहना है कि नान के सभी गोदामों और राशन दुकानों में स्टाक भेज दिया गया है। अभी कहीं कमी नहीं है। सरकार ने कार्डधारियों को एक साथ फरवरी और मार्च का चावल बांटने का आदेश दिया है। इसके निगरानी के लिए टीम बना दी गई है।

