अब महंगा नहीं होगा पेट्रोल-डीजल और LPG? IOC ने उठाया ऐसा कदम, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ेगा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार गहराते युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर लाल सागर तक फैले तनाव के बीच भारत की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी कंपनी ‘इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन’ (IOC) ने आम नागरिकों को वैश्विक महंगाई के झटकों से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने कच्चे तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के आयात के लिए विदेशी मालवाहक जहाजों पर अपनी निर्भरता समाप्त करने और अपने खुद के जहाजों का बेड़ा तैयार करने का निर्णय लिया है। विदेशी कंपनियों के अचानक भाड़ा बढ़ाने और मनमानी डिलीवरी से निपटने के लिए उठाए गए इस कदम का सीधा असर देश के आम उपभोक्ता के घरेलू बजट पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा।
आम जनता के लिए क्यों बड़ी खुशखबरी है यह फैसला?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहाजों की कमी या युद्ध का डर जब भी बढ़ता है, उसका पहला नुकसान देश के आम उपभोक्ता को अपनी जेब खाली करके चुकाना पड़ता है। IOC के अपने जहाज होने से आम जनता को तीन प्रमुख मोर्चों पर सीधी सुरक्षा मिलेगी:
पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडरों के दामों में उछाल पर रोक:
जब वैश्विक मार्गों पर संकट आता है, तो विदेशी शिपिंग कंपनियां बीमा और मालभाड़े में अचानक भारी इजाफा कर देती हैं। इससे देश में तेल लाना महंगा हो जाता है, जिसका बोझ अंततः पेट्रोल पंपों पर आम जनता की जेब पर पड़ता है। अपने जहाज होने से भाड़े की अनिश्चितता समाप्त होगी, जिससे खुदरा बाजार में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में स्थिरता आएगी।
रसोई गैस और ईंधन की किल्लत से पूरी आजादी:
अक्सर युद्ध के डर से विदेशी कंपनियां जोखिम भरे समुद्री मार्गों से भारत के लिए सप्लाई देने से इनकार कर देती हैं। ऐसे में देश में गैस सिलेंडर या पेट्रोल की कमी का जोखिम पैदा हो जाता है। अब खुद का बेड़ा होने से विपरीत से विपरीत हालात में भी भारतीय जहाजों से कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई निरंतर जारी रहेगी, यानी उपभोक्ताओं को कभी सिलेंडर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सप्लाई का सटीक समय और लॉजिस्टिक्स नियंत्रण:
किराए के जहाजों पर निर्भर न रहकर IOC अपनी सुविधा और जरूरत के मुताबिक जहाजों के रूट और बंदरगाहों तक पहुंचने का समय तय कर सकेगी। इससे रिफाइनरियों को समय पर कच्चा माल मिलेगा और देश के हर कोने में ईंधन की बिना रुकावट उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
बोर्ड ने दी मंजूरी, जारी हो चुके हैं टेंडर
इंडियन ऑयल के वित्त निदेशक अनुज जैन ने दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों के दौरान जानकारी दी कि कंपनी का बोर्ड जहाजों की खरीद के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे चुका है और इसके लिए कई महीने पहले वैश्विक स्तर पर टेंडर जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की ऊर्जा संप्रभुता के लिए अब ऊर्जा कंपनियों का स्वयं के जहाजों पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी हो गया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को बढ़ावा देते हुए कंपनी घरेलू स्तर पर जहाज निर्माण की संभावनाओं को भी तलाश रही है।
क्यों लेना पड़ा यह सख्त फैसला?
हालिया महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के चलते कई विदेशी शिपिंग कंपनियों ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए सप्लाई करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इसके चलते शिपिंग का किराया और वॉर-रिस्क इंश्योरेंस कई गुना बढ़ गया था, जिससे तेल आयात का खर्च अत्यधिक बढ़ रहा था। अब खुद के जहाजों की मदद से देश न केवल विदेशी दबाव से मुक्त होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी ईंधन की सुरक्षित और किफायती सप्लाई का स्थायी भरोसा मिलेगा।

