‘सरकार सत्र की अवधि घटा सकती है, जनता की समस्याएं नहीं’, 5 दिन के शीतकालीन सत्र पर उमंग सिंघार का तीखा हमला
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का औपचारिक ऐलान हो गया है। आगामी सत्र 7 दिसंबर से प्रारंभ होकर 11 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल पांच दिनों के भीतर पांच बैठकें होंगी। विधानसभा सचिवालय द्वारा इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्देश पर सत्र आहूत किया गया है, जिसमें तय नियमों के तहत प्रश्नकाल भी संचालित होगा।
नोटिस और प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा निर्धारित
विधानसभा सचिवालय ने सत्र की कार्यवाही के लिए सदस्यों द्वारा दी जाने वाली सूचनाओं और प्रस्तावों की तिथियां भी घोषित कर दी हैं:
प्राइवेट मेंबर्स बिल: गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों के नोटिस 11 नवंबर तक लिए जाएंगे।
प्राइवेट मेंबर्स रेजोल्यूशन्स: अशासकीय संकल्पों से जुड़ी सूचनाएं 26 नवंबर तक जमा की जा सकेंगी।
स्थगन व ध्यानाकर्षण प्रस्ताव: नियम 267-A, ध्यानाकर्षण तथा स्थगन प्रस्तावों के नोटिस 1 दिसंबर से स्वीकार होंगे, जिन्हें कार्य दिवस में सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच सचिवालय में जमा कराना होगा।
सत्र की छोटी अवधि पर नेता प्रतिपक्ष का तीखा ऐतराज
सत्र को केवल पांच दिनों तक सीमित रखे जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मोहन सरकार पर सीधा हमला बोला है। सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जनसमस्याएं चरम पर हैं, लेकिन सरकार सदन में खुली बहस से बच रही है। उन्होंने पिछले मानसून सत्र का हवाला देते हुए कहा कि तब भी पांच दिन का सत्र तय कर उसे महज तीन दिनों में ही समेट दिया गया था और अब फिर से वही रवैया दोहराया जा रहा है।
कई सुलगते मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी करेगा विपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्ष जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर जवाबदेही तय करेगा। उन्होंने कहा कि बालाघाट में मासूम बच्चों की मौत, सागर और देवास में कथित तौर पर जहरीली शराब से हुई जनहानि, किसानों की बदहाली, युवाओं में बेरोजगारी और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध जैसे मुद्दे सीधे जनता से जुड़े हैं। इसके साथ ही आदिवासी समुदाय के हक, स्वास्थ्य-शिक्षा का ढांचा, राज्य पर लगातार बढ़ता कर्ज और कानून-व्यवस्था की बदहाली पर सदन में चर्चा होना अनिवार्य है।
‘सरकार सत्र की अवधि घटा सकती है, जनता की समस्याएं नहीं’
सिंघार ने जोर देकर कहा कि राज्य की 230 विधानसभा क्षेत्रों से आने वाले जन प्रतिनिधि 7 करोड़ से अधिक प्रदेशवासियों की आवाज हैं। ऐसे में जब जनहित के सवालों की लंबी सूची है, तब बैठकों की संख्या घटाई नहीं बल्कि बढ़ाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार सत्र के दिन कम कर सकती है, लेकिन जनता के दर्द और सवालों से नहीं बच सकती; कांग्रेस पार्टी सदन के भीतर इन सभी मुद्दों को पूरी ताकत से उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करेगी।

