शासकीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! सरकार ने मंजूर किया 30 दिन का बोनस, जानिए किसे कितना मिलेगा पैसा
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने राज्य के लाखों कर्मचारियों को राहत देते हुए वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए 30 दिन के तदर्थ (Ad-hoc) बोनस के भुगतान को हरी झंडी दे दी है। राज्यपाल की औपचारिक सहमति मिलने के बाद वित्त विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया। सरकार के इस आदेश से नियमित राज्य कर्मचारियों के साथ-साथ सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों के कर्मचारियों और दैनिक वेतन भोगियों को सीधा फायदा मिलेगा।
पात्रता की शर्तें और वेतन सीमा
जारी शासनादेश के अनुसार, बोनस का लाभ केवल पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों को दिया जाएगा। इसके दायरे में वे कर्मचारी आएंगे जिनका पद वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 या अपुनरीक्षित वेतनमान में ग्रेड पे 4,800 रुपये तक है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी को सुनिश्चित करियर प्रोन्नति (ACP) व्यवस्था के तहत इससे अधिक वेतन लेवल मिल रहा है, तब भी उसकी बोनस की पात्रता अप्रभावित रहेगी। बोनस पाने के लिए 31 मार्च 2026 तक न्यूनतम एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी होना आवश्यक है।
भुगतान की व्यवस्था: 75 फीसदी GPF और 25 फीसदी नकद
बोनस भुगतान के लिए वित्त विभाग ने नकद और बचत का संयुक्त ढांचा तैयार किया है:
सामान्य कर्मचारी: कुल अनुमन्य बोनस का 75 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी के सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाते में जमा किया जाएगा, जबकि 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे नकद मिलेगा।
गैर-GPF सदस्य: जो कर्मचारी भविष्य निधि के दायरे में नहीं आते, उनकी 75 फीसदी राशि को राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) अथवा पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) के जरिए दिया जाएगा।
सेवानिवृत्त कर्मियों को पूरा भुगतान नकद
शासनादेश में सेवानिवृत्ति की कगार पर खड़े और सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को पूरी राशि नकद देने का प्रावधान किया गया है। वे कर्मचारी जो 31 मार्च 2026 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं अथवा 30 अप्रैल 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उन्हें बोनस की पूरी 100 प्रतिशत धनराशि का भुगतान सीधे नकद किया जाएगा।
दागी और जांच के दायरे में आए कर्मियों पर रोक
शासनादेश में यह भी रेखांकित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-2026 के दौरान यदि किसी कर्मचारी को किसी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अथवा आपराधिक मुकदमे में दंडित किया गया है, तो वह इस तदर्थ बोनस के लिए पात्र नहीं होगा। वहीं, जिन कर्मचारियों के खिलाफ जांच या अदालती कार्यवाही वर्तमान में लंबित है, उनका बोनस परिणाम आने तक स्थगित रहेगा; जांच में पूरी तरह दोषमुक्त पाए जाने के बाद ही उन्हें रोके गए वर्षों का पूरा बोनस एक साथ जारी किया जाएगा।

