आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर बड़ा कदम: तीनों सेनाओं के लिए 2.12 लाख करोड़ के रक्षा सौदे मंजूर
नई दिल्ली। सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और भविष्य की युद्ध रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने रक्षा तंत्र के लिए खजाना खोल दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में थल सेना, नौसेना और वायु सेना की सामरिक जरूरतों के लिए करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के बड़े खरीद प्रस्तावों को प्राथमिक मंजूरी प्रदान की गई। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को प्राथमिक एजेंडा बनाते हुए इस कुल स्वीकृत बजट का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा घरेलू भारतीय विनिर्माताओं से पूरा करने का निर्णय लिया गया है।
थल सेना को मिलेंगे आधुनिक वाहन, ट्रैकिंग रडार और कामिकेज ड्रोन
थल सेना की दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में आक्रामक क्षमता बढ़ाने के लिए भारी-भरकम साजो-सामान के अधिग्रहण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। नए प्रस्ताव के तहत सेना को आधुनिक स्वचालित तोप प्रणालियां, कठिन रास्तों पर तेज आवाजाही सुनिश्चित करने वाले उच्च गतिशीलता वाहन और शत्रु के तोपखाने की लोकेशन बताने वाले गन-लोकेटिंग सिस्टम दिए जाएंगे। इसके साथ ही नए जमाने के युद्धों को देखते हुए काउंटर-ड्रोन तकनीक, लंबी दूरी के टोही मानवरहित विमान और लक्ष्य पर सटीक वार करने वाले आत्मघाती ड्रोन्स को थल सेना के शस्त्रागार में शामिल किया जाएगा।
नौसेना के जहाजों को मिलेगा मिसाइल-रोधी सुरक्षा कवच
समुद्री मोर्चे पर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए भारतीय नौसेना के नए लड़ाकू जहाजों और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। रक्षा परिषद ने एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम की खरीद पर मुहर लगाई है, जो दुश्मन देश की घातक एंटी-शिप मिसाइलों को चकमा देकर जहाजों को सुरक्षित रखने में कारगर साबित होगा। ये तमाम युद्धपोत और सुरक्षा प्रणालियां स्वदेशी स्तर पर डिजाइन और निर्मित की जाएंगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
वायु सेना के बेड़े में जुड़ेंगे मल्टीपर्पज हेलीकॉप्टर और डॉप्लर रडार
आसमानी सुरक्षा और परिवहन तंत्र को मजबूत करने के लिए भारतीय वायु सेना के खाते में नए हल्के बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर, आधुनिक हथियार और वायु रक्षा प्रणालियां शामिल की गई हैं। इन बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टरों का साझा उपयोग थल और वायु सेना दोनों द्वारा रणनीतिक खोज, बचाव और टोही अभियानों के लिए किया जाएगा। वहीं अग्रिम सीमावर्ती क्षेत्रों में पल-पल बदलते मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार तैनात किए जाएंगे, जिससे खराब मौसम के दौरान भी सैन्य विमानों के संचालन और सामरिक रणनीतियों को सटीक रूप से अंजाम दिया जा सकेगा।

