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‘लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की कोशिश’: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर साइन करने से किया इनकार

नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शनिवार को एक अहम प्रेस वार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार, प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) पर रोक लगाने की मांग को लेकर देशभर में तेज होते विरोध प्रदर्शनों के बीच, उन्होंने प्रशासन द्वारा छात्रों व कार्यकर्ताओं पर थोपे जा रहे ‘पीस बॉन्ड’ का कड़ा विरोध किया और इसे असहमति की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया।

‘पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करेंगे, अदालत में लड़ेंगे लड़ाई’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेहा बोरा ने प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिसों को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने दो टूक कहा, “हम किसी भी कीमत पर इस पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले हैं। हम इसे लगातार चुनौती देते रहेंगे, क्योंकि अगर आज हमने इस पर दस्तखत कर दिए तो यह एक खतरनाक नजीर बन जाएगी कि देश में होने वाले हर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन को रोकने के लिए पीस बॉन्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।”

उन्होंने आगे बताया कि प्रशासन की ओर से मिले नोटिस की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए छात्र संगठन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार को सुरक्षित रखा जा सके।

‘SIR के जरिए छीना जा रहा नागरिकों का मताधिकार’

नेहा बोरा ने लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक समाज की नींव दो बातों पर टिकी होती है, नागरिकों का मतदान का अधिकार और अधिकारों के हनन पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की आजादी।

केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में एसआईआर के जरिए आम जनता से उनका सबसे बड़ा अधिकार यानी वोट देने का हक छीना जा रहा है। इलेक्टोरल रोल से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। जिस निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया से कोई मुल्क लोकतंत्र कहलाता है, आज उसी प्रक्रिया की पारदर्शिता को खत्म किया जा रहा है।

छात्र नेता ने कहा कि युवाओं और लोकतांत्रिक आवाजों को डराने व दबाने के लिए चाहे जितने भी प्रशासनिक कदम उठाए जाएं, संगठन पीछे नहीं हटेगा और जनता के अधिकारों की हिफाजत के लिए सड़क से लेकर कानूनी मंचों तक संघर्ष जारी रखेगा।

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