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अभिजीत दिपके के घर कौन-सा नोटिस देने पहुंची थी दिल्ली पुलिस? यहां समझिए पूरा मामला

नईदिल्ली : दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को 16 अक्टूबर, 2026 को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के संबंध में नोटिस जारी किया है। नोटिस में दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित दो मामलों का हवाला दिया गया है। पुलिस का दावा है कि आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना कनॉट प्लेस में इकट्ठा होने के लिए सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया पर अपील की गई थी।

दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29 पुलिस को सार्वजनिक निर्देश जारी करने का अधिकार देती है। इस धारा के तहत, पुलिस आयुक्त और इंस्पेक्टर से ऊपर के रैंक के अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता को मौखिक या लिखित निर्देश जारी कर सकते हैं, जो कानून के दायरे में होने चाहिए।

इस धारा के तहत पुलिस को ये अधिकार दिए गए हैं

– जुलूस और सभाएं: सड़कों पर जुलूस या सभा में शामिल लोगों के व्यवहार और गतिविधियों को नियंत्रित करना।
– रूट और समय तय करना: जुलूस किन रास्तों से और किस समय गुजर सकता है, यह तय करना।
– रास्ते की रुकावट रोकना: जुलूस, सभाओं, धार्मिक स्थलों के आसपास और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर अवरोध रोकना।
– सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना: सड़कों, मेलों, मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, चर्चों और अन्य सार्वजनिक या धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखना।
– संगीत और शोर नियंत्रित करना: सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर संगीत, गाने, ढोल और अन्य शोर करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल को नियंत्रित करना।
– लाउडस्पीकर पर नियंत्रण: रिहायशी इलाकों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के पास लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को नियंत्रित करना।
– अन्य जरूरी निर्देश: ऊपर दिए गए आदेशों को लागू करने और उनके उद्देश्य को पूरा करने के लिए उचित निर्देश जारी करना।

जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के प्रदर्शन के संदर्भ में इसका क्या मतलब है?

यह धारा पुलिस को जुलूसों और सभाओं, उनके मार्गों और सार्वजनिक व्यवस्था को विनियमित करने का अधिकार देती है। इसलिए, प्रदर्शनों के दौरान मार्ग निर्धारित करना, भीड़ को नियंत्रित करना और बाधाओं को रोकना इस धारा के दायरे में आ सकता है।

हालांकि, धारा 29 का पाठ स्वतः ही यह प्रावधान नहीं करता कि पुलिस बिना शर्त किसी भी प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा सकती है या जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से स्थायी रूप से हटा सकती है। ऐसे कार्यों की वैधता का आकलन संबंधित आदेश, अन्य लागू कानूनों और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर किया जाना चाहिए। (एजेंसी)

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