अयोध्या के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर से सोना चोरी का आरोप, प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान में, जांच शुरू
वाराणसी: अयोध्या के राम मंदिर में दान की गई वस्तुओं की चोरी को लेकर उठे विवाद के बाद अब काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सोने की चोरी के आरोप सामने आए हैं। बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव ने यह आरोप लगाया है। 23 सितंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजे गए एक शिकायत पत्र में वकील नित्यानंद राय ने शिकायत की है कि मंदिर के शिखर समेत कई जगहों से सोना निकालकर उस पर दोबारा रंग किया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान के बाद, जिला प्रशासन ने जांच शुरू की और शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया। शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें तस्वीरों के माध्यम से जांच पर सवाल उठाए गए हैं और मंदिर प्रशासन से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
29 सितंबर को की थी पीएमओ से शिकायत
तेलियाबाग निवासी अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि 29 सितंबर को उन्होंने संभागीय आयुक्त और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर दो स्थानों से सोने के कलश गायब हैं। उनकी जगह पर कुछ रंग चढ़ा दिया गया है।नित्यानंद राय ने बताया कि यह तकरीबन 2 से लेकर 3 फीट की चौड़ाई का था। पहले भी मंदिर से सोना चांदी की चोरी हो चुकी है, इसलिए इस प्रकरण की गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है। ऐसा पैच करीब दो से तीन जगहों पर है।
मंदिर प्रशासन श्वेत पत्र जारी करे’
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने विश्वनाथ मंदिर प्रशासन से मंदिर में मिली सभी सोने-चांदी की वस्तुओं की विस्तृत सूची वाली वेबसाइट जारी करने की मांग की है। उन्हें सावन माह के दौरान मंदिर के शिखर से सोना गायब होने की जानकारी मिली। वे प्रतिदिन आरती के लिए विश्वनाथ मंदिर जाते हैं। शिखर पर दर्शन के दौरान ही उन्हें इस घटना की जानकारी मिली। उन्होंने प्रशासन को इस मामले से संबंधित सभी सबूत और तस्वीरें उपलब्ध करा दी हैं।
मंडल आयुक्त बोले- आईआईटी मद्रास कराएगा मरम्मत
प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान के बाद वाराणसी जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। वाराणसी संभागीय आयुक्त और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष एस. राज लिंगम ने बताया कि हाल ही में एक घटना में सोने का एक कलश गिर गया था, जिसे विश्वनाथ मंदिर में सुरक्षित रखा गया है।पुनर्स्थापना के लिए आईआईटी मद्रास से सर्वे कराया गया है। उसकी मदद से जल्द ही फिर से कलश स्थापित कराया जाएगा। बिना किसी तकनीकी परीक्षण के कलश को दोबारा लगाना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है। इसके लिए आईटी मद्रास से संपर्क किया गया है और वहां की टीम प्राथमिक सर्वे का काम कर चुकी है।(एजेंसी)

