काम से इनकार और अनुशासनहीनता पर सख्त प्रहार: देवास और गुना में 7 पटवारी सेवामुक्त, मप्र में मचा हड़कंप
भोपाल/देवास/गुना। मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मनमानी, अनुपस्थिति और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की नाफरमानी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ राजस्व प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना’ के कार्यों का बहिष्कार करने, राजस्व रिकॉर्ड में शून्य प्रगति दिखाने और मुख्यालय पर उपस्थित न रहने के आरोप में देवास और गुना जिले में कुल 7 पटवारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा, गुना जिले में पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष सहित 4 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
देवास में 3 परिवीक्षाधीन पटवारियों को दिखाया बाहर का रास्ता
देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए सोनकच्छ तहसील के ग्राम घिचलाय में पदस्थ नितिन विश्वकर्मा, देवास ग्रामीण के अजय नागर और टोंकखुर्द तहसील के विशाल टईया की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। फरवरी 2024 में 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्त किए गए इन पटवारियों के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पाई गईं। जांच में साबित हुआ कि ये पटवारी अपने आवंटित क्षेत्र में निवास नहीं कर रहे थे, नियमित रूप से अनुपस्थित रहते थे और पिछले छह महीनों में इनकी राजस्व वसूली का स्तर भी बेहद चिंताजनक था। शर्तों के तहत एक माह का अग्रिम वेतन देकर इन्हें सेवामुक्त कर दिया गया है।
गुना में 54वें नंबर पर फिसली रैंकिंग, संघ अध्यक्ष समेत 4 सस्पेंड
गुना जिले में स्थिति और भी गंभीर देखने को मिली, जहां स्वामित्व योजना के तहत पंजीयन कार्य पूरी तरह ठप रहने के कारण जिले की राज्य स्तरीय रैंकिंग गिरकर 54वें स्थान पर पहुंच गई थी। मामले को अनुशासनहीनता का गंभीर रूप मानते हुए कलेक्टर ने जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र किरार के साथ-साथ बमौरी के ललित मोहन शर्मा, कुंभराज के विजय सिंह भील और मकसूदनगढ़ के मेहरबान भील को सस्पेंड कर दिया। इसी क्रम में योजना के काम में सहयोग न करने और लापरवाही बरतने वाले 4 प्रशिक्षु पटवारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।
जवाबदेही के डर से काम का बहिष्कार पड़ा महंगा
इस पूरे विवाद की जड़ 15 सितंबर को पटवारियों द्वारा दिया गया वह ज्ञापन था, जिसमें उन्होंने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री कार्य करने से साफ मना कर दिया था। पटवारियों का रुख था कि योजना में दस्तावेजों के पंजीयन के दौरान यदि भविष्य में कोई विधिक या तकनीकी अड़चन आती है, तो पूरी जिम्मेदारी सीधे पटवारियों पर थोप दी जाएगी। हालांकि, एसडीएम द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने और शासन के शीर्ष निर्देशों की खुली अवहेलना को देखते हुए प्रशासन ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत यह कठोर कदम उठाया है।

