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Cancer Treatment: 700 रिसर्च पेपर पढ़कर AI ने खोजा कैंसर से लड़ने का नया रास्ता, MYC को रोकने की उम्मीद

Cancer Treatment News: गूगल के AI टूल ‘को-साइंटिस्ट’ ने 700 से ज्यादा वैज्ञानिक शोधपत्रों का विश्लेषण करने के बाद कैंसर में सक्रिय MYC प्रोटीन को नियंत्रित करने का एक नया तरीका सुझाया है। AI ने प्रोटीन समूहों को तोड़ने के बजाय उन्हें आपस में जोड़ने का विचार दिया है। इस पर अब वैज्ञानिक लैब में परीक्षण कर रहे हैं।

कैंसर के इलाज में MYC क्यों है बड़ी चुनौती?

कैंसर की रिसर्च में वैज्ञानिकों के सामने MYC प्रोटीन को नियंत्रित करना लंबे समय से एक मुश्किल चुनौती रहा है। MYC शरीर में कोशिकाओं की वृद्धि और उनके कामकाज को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन कई तरह के कैंसर में यह जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है।

MYC की अत्यधिक सक्रियता कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि में योगदान कर सकती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से इस प्रोटीन को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करने के तरीके खोज रहे हैं।

लेकिन MYC को सीधे निशाना बनाकर उसे रोकना आसान नहीं है। ऐसे में अब AI की मदद से इस समस्या को देखने का एक अलग तरीका सामने आया है।

700 से ज्यादा रिसर्च पेपर पढ़कर AI ने सुझाया रास्ता

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के वाइटहेड इंस्टीट्यूट की शोधकर्ता एना पर्टल ने गूगल के AI टूल ‘को-साइंटिस्ट’ के सामने MYC को नियंत्रित करने के लिए नए और व्यावहारिक तरीके से जुड़ा सवाल रखा।

यह AI सिस्टम सामान्य चैटबॉट की तरह सिर्फ एक जवाब देने तक सीमित नहीं है। यह अलग-अलग AI एजेंट्स की मदद से वैज्ञानिक साहित्य का अध्ययन करता है, संभावित रास्तों पर विचार करता है और फिर उपलब्ध विकल्पों का विश्लेषण करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगले दिन तक AI सिस्टम 700 से ज्यादा रिसर्च पेपर पढ़ चुका था। इसके बाद उसने MYC को नियंत्रित करने के 108 संभावित तरीकों की पहचान की।

इनमें से 107 तरीकों को कम उपयोगी या अव्यावहारिक मानने के बाद AI ने एक ऐसे विचार को आगे बढ़ाया, जो मौजूदा सोच से अलग था।

प्रोटीन तोड़ने के बजाय उन्हें चिपकाने का सुझाव

AI का सबसे दिलचस्प सुझाव यह था कि MYC से जुड़े कुछ प्रोटीन समूहों को तोड़ने या हटाने के बजाय उन्हें आपस में चिपकाया जाए।

इसके पीछे विचार यह है कि कैंसर कोशिकाओं के भीतर मौजूद कुछ प्रोटीन समूह MYC से जुड़े DNA को पढ़ने और उसे सक्रिय करने की प्रक्रिया में मदद करते हैं। यदि इन प्रोटीन समूहों को एक जगह इकट्ठा कर दिया जाए, तो उनकी सामान्य गतिविधि प्रभावित हो सकती है।

इससे MYC की गतिविधि कमजोर पड़ने और कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को प्रभावित करने की संभावना हो सकती है।

हालांकि, यह अभी एक वैज्ञानिक परिकल्पना और शुरुआती रिसर्च आइडिया है। इसे प्रभावी और सुरक्षित कैंसर उपचार मानने से पहले कई स्तरों पर वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होंगे।

अब लैब में होगी AI के आइडिया की असली परीक्षा

AI द्वारा सुझाए गए इस विचार पर वैज्ञानिक अब लैब में परीक्षण कर रहे हैं। शोधकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या यह तरीका वास्तव में कैंसर कोशिकाओं में MYC की गतिविधि को कम कर सकता है।

इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि इस तरीके का सामान्य कोशिकाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या भविष्य में इसे किसी सुरक्षित उपचार के रूप में विकसित किया जा सकता है।

वाइटहेड इंस्टीट्यूट के बायोइंजिनियर कलोन ओवरहोल्ट ने इस विचार को मजबूत और सोचने लायक बताया है। उनके मुताबिक, उनकी टीम ने पहले इस तरह से समस्या को देखने की कल्पना नहीं की थी।

क्या AI ने कैंसर का इलाज खोज लिया?

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि AI ने कैंसर का इलाज खोज लिया है।

AI ने वैज्ञानिकों को MYC को नियंत्रित करने का एक नया संभावित रास्ता सुझाया है। लेकिन किसी भी नए कैंसर उपचार को मरीजों तक पहुंचने से पहले प्रयोगशाला परीक्षण, प्री-क्लिनिकल रिसर्च और कई चरणों के क्लिनिकल ट्रायल से गुजरना पड़ता है।

फिलहाल वैज्ञानिक यह जांच रहे हैं कि AI का सुझाया हुआ तरीका वास्तव में MYC की गतिविधि और कैंसर कोशिकाओं के व्यवहार पर कितना असर डालता है।

MYC को रोकना क्यों है इतना मुश्किल?

MYC शरीर के सामान्य कामकाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसे पूरी तरह बंद कर देना भी आसान या जरूरी समाधान नहीं है। चुनौती यह है कि कैंसर कोशिकाओं में इसकी असामान्य सक्रियता को नियंत्रित किया जाए, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं के सामान्य कार्य प्रभावित न हों।

इसी वजह से वैज्ञानिक MYC को सीधे बंद करने के बजाय उसके काम करने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले अलग-अलग रास्तों पर शोध कर रहे हैं।

AI का नया सुझाव इसी दिशा में एक अलग वैज्ञानिक दृष्टिकोण सामने रखता है। अब यह देखना बाकी है कि शुरुआती लैब परीक्षण इस विचार को कितना समर्थन देते हैं।

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