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6,500 से 9,500 रुपए हुआ कोयला,सरिया भी 10-15% तक हो सकता है महंगा

Coal Supply Crisis

रायपुर। मानसून के कारण छत्तीसगढ़ के स्पंज आयरन उद्योगों के सामने कोयले की उपलब्धता को लेकर संकट बढ़ गया है। उद्योगों को लिंकेज के तहत उनकी जरूरत के मुताबिक कोयला नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उत्पादन जारी रखने के लिए खुले बाजार से महंगे दाम पर कोयला खरीदना पड़ रहा है। उद्योग पक्ष के मुताबिक, सामान्य दिनों में जहां बाजार से 20 से 25 फीसदी जरूरत पूरी की जाती थी, वहीं मौजूदा समय में यह आंकड़ा 70 से 75 फीसदी तक पहुंच गया है।

मानसून में क्यों बढ़ी कोयले की परेशानी?

प्रदेश में करीब 80 स्पंज आयरन उद्योगों को एसईसीएल के माध्यम से लिंकेज का कोयला मिलता है। मानसून के दौरान कुछ खदानों में पानी भरने से कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा उपलब्ध कोयले में पावर सेक्टर को प्राथमिकता मिलने से स्पंज आयरन उद्योगों को कम मात्रा में आपूर्ति मिल रही है।

इसका असर सीधे उत्पादन प्रक्रिया पर पड़ रहा है और उद्योगों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बाजार से अतिरिक्त कोयला खरीदना पड़ रहा है।

खुले बाजार में 40% तक बढ़े दाम

उद्योग संचालकों के मुताबिक, कोयले की बाजार कीमत में करीब 40 फीसदी तक वृद्धि हुई है। जिस कोयले के लिए पहले लगभग 6,500 रुपए प्रति टन खर्च करना पड़ता था, उसकी कीमत अब करीब 9,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है।

यानी उद्योगों को एक टन कोयले के लिए पहले की तुलना में करीब 3 हजार रुपए ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। बाजार पर निर्भरता बढ़ने के कारण उत्पादन लागत लगातार बढ़ने की बात कही जा रही है।

स्पंज आयरन बनाने में बड़ी मात्रा में कोयला जरूरी

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, एक टन स्पंज आयरन के उत्पादन के लिए करीब 1.6 टन कोयले की आवश्यकता होती है। ऐसे में कोयले के दाम में मामूली बढ़ोतरी भी उत्पादन लागत पर बड़ा असर डाल सकती है।

मौजूदा कीमतों के आधार पर स्पंज आयरन की उत्पादन लागत में करीब 20 फीसदी तक वृद्धि होने का दावा किया गया है। फिलहाल स्पंज आयरन का बाजार भाव लगभग 28 हजार रुपए प्रति टन बताया गया है।

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सरिया के भाव पर भी पड़ सकता है असर

स्पंज आयरन की लागत बढ़ने का असर आगे स्टील उत्पादों पर पड़ सकता है। खासतौर पर सरिया की कीमतों को लेकर उद्योगों ने चिंता जताई है। उद्योग पक्ष के अनुसार, आने वाले समय में सरिया के दाम में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना है।

वर्तमान में सरिया की बेसिक कीमत करीब 42 हजार रुपए प्रति टन बताई जा रही है। अलग-अलग एमएम के हिसाब से इसमें करीब 6 हजार रुपए का अंतर जुड़ता है। 18 फीसदी जीएसटी के बाद प्लांट स्तर पर कीमत करीब 56,640 रुपए प्रति टन तक पहुंचती है। थोक बाजार में यह करीब 58 हजार और खुदरा बाजार में करीब 60 हजार रुपए प्रति टन बताई जा रही है।

विदेशी कोयले ने भी बढ़ाया खर्च

रोलिंग मिलों में इस्तेमाल होने वाले इंडोनेशियाई कोयले की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। उद्योग पक्ष के अनुसार, इसकी कीमत करीब 12 हजार रुपए प्रति टन से बढ़कर 16 हजार रुपए प्रति टन हो गई है।

इस तरह विदेशी कोयले पर भी करीब 4 हजार रुपए प्रति टन अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। स्पंज आयरन की बढ़ती लागत और विदेशी कोयले की कीमत में इजाफा, दोनों का असर रोलिंग मिलों की लागत पर पड़ रहा है।

उद्योग संगठन ने बताया सप्लाई का संकट

छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार मंडल ने कहा कि उद्योगों को लिंकेज के तहत पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिल रहा है। खुले बाजार में कोयले के भाव बढ़ने के कारण उत्पादन लागत बढ़ी है। उनके मुताबिक, यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगे स्पंज आयरन के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है।

फिलहाल उद्योगों के लिए सबसे बड़ी चिंता कोयले की उपलब्धता और उसकी कीमत बनी हुई है। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति सामान्य होती है या नहीं, इसी पर उत्पादन लागत और स्टील उत्पादों की कीमतों का असर निर्भर करेगा।

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