’मुझे तूफानी समुद्र में तैरना पसंद है’: चुनाव आयोग से जारी घमासान के बीच राहुल गांधी के इस संदेश के क्या है मायने?
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता को लेकर जारी तीखी बयानबाजी के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रविवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘एक्स’ पर एक संक्षिप्त लेकिन गहरा संदेश साझा किया। इसमें उन्होंने अशांत लहरों के बीच तैरने और मुश्किल हालात में आंतरिक शांति बनाए रखने की बात कही। यद्यपि उन्होंने अपनी इस पोस्ट में न तो चुनाव आयोग का उल्लेख किया और न ही SIR विवाद का, फिर भी वर्तमान राजनीतिक माहौल के चलते इस बयान को सीधे मौजूदा टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राहुल गांधी ने लिखा, “मुझे तूफानी समुद्र में तैरना पसंद है। यह सिखाता है कि तूफानी होना भी शांति का ही एक रूप है।” यह पोस्ट उस समय सामने आई है जब कांग्रेस पार्टी मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर और निर्वाचन आयोग की कार्यशैली को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस दार्शनिक वाक्य के जरिए राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारी राजनीतिक दबाव और टकराव के दौर में भी वे विचलित होने वाले नहीं हैं।
आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं राहुल गांधी
गौरतलब है कि इस पोस्ट से पहले राहुल गांधी चुनाव आयोग पर बेहद कड़े आरोप लगा चुके हैं। 2024 के लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और ‘संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे’ जैसे तीखे आरोपों के जरिए केंद्र सरकार और आयोग को घेरा था। यह सियासी विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR, फॉर्म-6 और मतदाता डेटा से जुड़े कई फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
आयोग ने दी सफाई, कहा कि ‘सर्वसम्मति से हुए सारे फैसले’
आंतरिक मतभेद की खबरों के सार्वजनिक होने के बाद चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर खंडन जारी किया था। आयोग का कहना है कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय, टिप्पणियां और सुझाव नीतिगत चर्चा का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन SIR सहित सभी बड़े फैसले तीनों आयुक्तों की पूर्ण सहमति और सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं। इसके अलावा, आयोग ने यह भी साफ किया कि फॉर्म-6 में संशोधन के बजाय पारदर्शिता के लिए अलग से ‘एनेक्सर डी’ का प्रावधान किया गया है। आयोग की इस सफाई के बावजूद राहुल गांधी के इस ‘तूफानी समुद्र’ वाले बयान ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

