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TMC नाम और चुनाव चिन्ह विवाद:ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आयोग से कहा- विवाद जल्दी सुलझाएं

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने से संबंधित मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सोमवार तक यह बताने का निर्देश दिया कि चुनाव चिन्ह फ्रीज के संबंध में अंतिम निर्णय कब लिया जाएगा। आयोग ने अभी उपचुनाव को देखते हुए अंतरिम फैसला लिया है। ममता बनर्जी गुट की तरफ से कहा गया कि अगर जल्द सिंबल पर आयोग फाइनल फैसला नहीं लेता है, तो नवंबर मे होने वाला कॉर्पोरेशन चुनाव प्रभावित होगा। इस मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई करेगा।

‘हमारे अस्तित्व का मामला…’

कपिल सिबल ने कहा कि यह हमारे अस्तित्व का सवाल है और अदालत को उचित कार्रवाई करनी चाहिए। न्यायमूर्ति बागची ने जवाब दिया कि इसका एकमात्र समाधान यही है कि चुनाव आयोग इस मामले पर जल्द फैसला ले। कपिल सिबल ने आगे कहा कि आयोग ने चुनाव प्रक्रिया के बीच में ही पार्टी के चुनाव चिन्ह को रोक दिया है। आयोग हर दिन नए उदाहरण पेश कर रहा है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है, तो चुनाव आयोग आगामी चुनावों में भी ऐसा ही करेगा और चुनाव के बीच में ही चिन्ह बदल देगा।

चुनाव आयोग ने हाल ही में ममता बनर्जी के गुट को “ममता टीएमसी” नाम और “फुटबॉल खिलाड़ी” का चिन्ह दिया है। बागी गुट को “डेमोक्रेटिक टीएमसी” नाम और “लिफाफा” चिन्ह दिया गया है। बागी गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा, “अदालत यह कैसे कह सकती है कि फैसला 20 दिन या एक महीने में सुनाया जाए? ये ऐसे मामले हैं जिनमें विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता होती है। हमें दस्तावेज और सबूत पेश करने होंगे।”

कोर्ट ने कहा- पता कीजिए कितना वक्त लगेगा…

CJI ने चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू से कहा, “पता कीजिए कि विवाद सुलझाने में कितना समय लगेगा। चुनाव आयोग खुद कह रहा है कि मौजूदा व्यवस्था उपचुनावों के लिए है। आयोग उचित समय ले सकता है।” मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए और चुनाव आयोग को भी अपने स्वतंत्र विवेक का प्रयोग करने का पर्याप्त मौका दिया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने चुनाव आयोग के वकील को आयोग से निर्देश लेने और सोमवार, 28 सितंबर को अदालत को समय सीमा के बारे में सूचित करने को कहा है। दोनों गुटों के दावों के बीच, चुनाव आयोग ने फिलहाल मूल नाम ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह को निलंबित कर दिया है और आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। (एजेंसी)

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