क्या निष्पक्ष नहीं रहा चुनाव आयोग? SIR विवाद पर ECI ने आंतरिक मतभेद नकारे, विपक्ष ने खोला CEC के खिलाफ मोर्चा
नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के आंतरिक कामकाज पर उठे सवालों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया में आई उन खबरों पर चुनाव आयोग ने पूर्ण विराम लगाने की कोशिश की है, जिनमें दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बीच नीतिगत निर्णयों पर भारी असहमति थी। चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि आयोग में किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं है और SIR सहित सभी महत्वपूर्ण फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
रिपोर्ट में 14 लिखित आपत्तियों का दावा, ECI ने बताया सर्वसम्मत
हाल ही में एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र की रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग की कार्यप्रणाली पर कम से कम 14 बार लिखित रूप से असहमति जताई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, आपत्तियां मुख्य रूप से फॉर्म-6 में संशोधन, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे संवेदनशील मामलों से जुड़ी थीं। हालांकि, आयोग ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विषय पर आयुक्तों की व्यक्तिगत राय या सुझाव अलग हो सकते हैं, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति के बाद ही सभी अंतिम आदेश जारी किए गए हैं।
विपक्ष का तीखा प्रहार: ‘एकतरफा चलाया जा रहा है आयोग’
इस प्रशासनिक विवाद के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अन्य दो सदस्यों की राय को नजरअंदाज कर फैसले थोपे जा रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सत्ता पक्ष के अनुकूल काम करने का आरोप लगाते हुए पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
‘लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश’- अखिलेश और अभिषेक बनर्जी ने मांगा SC का दखल
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को बेहद गंभीर करार देते हुए कहा कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक निकाय के सदस्यों की आवाज दबाई जा रही है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी। बनर्जी ने कहा कि यदि मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर संस्था के भीतर ही संदेह हो, तो यह संवैधानिक व्यवस्था पर गहरा आघात है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए साझा रणनीति बनाने का आह्वान किया है।

