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TMC विवाद में चुनाव आयोग का फैसला, ममता गुट को ‘फुटबॉल प्लेयर’, ऋतब्रत गुट को ‘लिफाफा’

Mamata Banerjee Election Symbol : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने पार्टी के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को “ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस” नाम दिया गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” नाम दिया गया है।

ममता गुट को ‘फुटबॉल प्लेयर’, ऋतब्रत खेमे को ‘एनवेलप’

चुनाव आयोग के निर्णय के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को “फुटबॉल प्लेयर” का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है, जबकि ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को “लिफाफा” का चुनाव चिन्ह दिया गया है। यह व्यवस्था ऐसे समय में हुई है जब दोनों गुट पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जता रहे हैं।

उपचुनाव में ‘फूल और घास’ चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक

चुनाव आयोग ने गुरुवार को आगामी उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित “फूल और घास” चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर दोनों गुटों के प्रतिबंध लगा दिए। यह प्रतिबंध पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और राजनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों पर लागू होगा। आयोग ने कहा कि यह अस्थायी व्यवस्था दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को समान स्तर पर लाने और उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए की गई है। आयोग ने कहा कि इस मामले में अंतिम निर्णय बाद में जारी किया जाएगा।

कैसे शुरू हुआ TMC में विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब बागी नेता ऋतब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय कार्य समिति की वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि समिति का कार्यकाल 11 फरवरी, 2025 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद लिए गए सभी निर्णय और नियुक्तियां अमान्य हो गईं। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऋतब्रता गुट ने पार्टी के पुराने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया है और आयोग को सौंपे गए बाद के संशोधनों को नजरअंदाज किया है।

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए मिलीभगत कर रहे हैं। राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को “दलीय चोरी” करार दिया और इसे देश के लोकतांत्रिक पतन से जोड़ा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यही प्रक्रिया पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस द्वारा अपनाई जा रही है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मतदाताओं की सुरक्षा के अपने संवैधानिक दायित्व की उपेक्षा कर रहा है और भाजपा को चुनाव परिणामों को पलटने में मदद कर रहा है।(एजेंसी)

 

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