पन्ना में ‘चिता आंदोलन’ का 5वां दिन, डूब प्रभावित आदिवासी बोले- मुआवजा नहीं तो आंदोलन जारी
Panna Protest News: विस्थापन और मुआवजे के मुद्दों को लेकर जिले में आदिवासी का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बांध परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का आंदोलन बुधवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। इस उग्र विरोध प्रदर्शन के तहत महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग जलमग्न क्षेत्र में लकड़ी के तख्तों पर लेटकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘चिता आंदोलन’ का नाम दिया है, जिसमें कई पुरुष और महिलाएं अपने गले में प्रतीकात्मक फंदे डाले हुए नजर आए। इस अनोखे और खतरनाक प्रदर्शन से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है मुआवजे और विस्थापन का पूरा विवाद?
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आरोप है कि मडझगवा और रुंझ बांध जैसी परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों को वर्षों बीत जाने के बाद भी उनका उचित मुआवजा नहीं मिला है। उनका दावा है कि भूमि अभिलेखों और मुआवजे के वितरण में घोर अनियमितताएं हैं, जिसके कारण पात्र आदिवासी परिवार इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। भटनागर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि घर और गांव डूब रहे हैं, लेकिन लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों की मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन ने कहा- बांटी जा रही है राहत राशि
दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को उनके अधिकारों और मिलने वाली राशि के बारे में गुमराह किया जा रहा है। अजयगढ़ प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, रुंझ सिंचाई परियोजना के अंतर्गत विश्रामगंज में विस्थापित 670 परिवारों और मढ़गुवा परियोजना के अंतर्गत बालूपुर, कुंवरपुर और बनेहारी में विस्थापित 1,219 परिवारों को 5 लाख रुपये प्रति परिवार दिए गए हैं। कुल मिलाकर 1,889 परिवारों को यह राशि प्राप्त हुई है। इसके अलावा, संशोधित पैकेज के तहत अतिरिक्त 7.50 लाख रुपये देने की प्रक्रिया भी प्राथमिकता के आधार पर जारी है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए शपथ पत्र, लिखित सहमति और संयुक्त बैंक खाते जैसी औपचारिकताएं पूरी कराई जा रही हैं। हालांकि, दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं का कहना है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में काफी अंतर है, और कई परिवार आज भी राहत का इंतजार कर रहे हैं। (एजेंसी)

