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खुद को MP का CM बता अभिजीत दीपके का इस्तीफा ड्रामा, भड़की BJP बोली- ‘कराएं दिमाग का इलाज’

भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट में संक्रामक बीमारी के चलते आदिवासी बच्चों की मौतों और स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक अनोखा और विवादित घटनाक्रम सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा व्यंग्य करते हुए खुद को ‘मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री’ घोषित कर सोशल मीडिया पर एक फर्जी त्यागपत्र जारी कर दिया। इस प्रतीकात्मक कदम के सामने आते ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे गंभीर मुद्दे का राजनीतिक तमाशा बनाना करार दिया है।

इस्तीफे के बहाने सरकार की व्यवस्था पर तीखा प्रहार

अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जारी पत्र में लिखा कि वे बालाघाट में आदिवासी बच्चों की जान जाने और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी अपने सिर लेते हुए ‘मुख्यमंत्री’ पद से त्यागपत्र दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह कदम उनके बालाघाट दौरे के ठीक बाद उठाया गया। दीपके पीड़ित परिवारों से मिलने बालाघाट पहुंचे थे, जहां उन्हें स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के कड़े विरोध और असहज करने वाले सवालों से जूझना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए यह व्यंग्यात्मक इस्तीफा पेश किया।

‘मजाक उड़ाने के बजाय दिमाग का इलाज करवाएं’

दीपके के इस पत्र पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। भोपाल से बीजेपी विधायक भगवानदास सबनानी ने इस पूरे प्रकरण को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए दीपके पर सीधा पलटवार किया।

बीजेपी विधायक भगवानदास सबनानी ने बयान जारी कर कहा कि अभिजीत दीपके को तुरंत अपने दिमाग का इलाज कराना चाहिए। मध्य प्रदेश चाहे बालाघाट का मामला हो या सागर की घटना, अपराधियों और लापरवाहों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभिजीत दीपके किसी भी संवैधानिक सदन के सदस्य तक नहीं हैं। मध्य प्रदेश कोई मखौल या नौटंकी का स्थान नहीं है जो जनता के दुखों और व्यवस्था का इस तरह मजाक उड़ाया जाए।

बीजेपी का कहना है कि संकट की घड़ी में सरकार पीड़ितों तक हरसंभव मदद पहुंचा रही है और ऐसे संवेदनशील मौकों पर इस तरह के राजनीतिक हथकंडे अपनाना केवल सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश है।

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