बिहार में बाढ़ से हाहाकार, 12 जिलों के 22 लाख से अधिक लोग प्रभावित; गंगा उफान पर
Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिससे 12 जिलों में 22 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। गंगा, गंडक, कोसी और पुनपुन सहित कई नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सारण और वैशाली में देखा जा रहा है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है, क्योंकि ऊपरी इलाकों में जलस्तर घटने के बाद निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने का खतरा है।
वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लेंगे। इसके बाद वह हाजीपुर के जढूआ स्थित राहत शिविर पहुंचेंगे। यहां मुख्यमंत्री बाढ़ पीड़ितों को दी जा रही सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे और राहत सामग्री का वितरण भी करेंगे।
गंगा नदी का रौद्र रूप
केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह 6 बजे पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 21 अगस्त, 2016 को दर्ज किए गए उच्चतम जलस्तर 50.52 मीटर से 0.05 मीटर अधिक है। पंडारक में जलस्तर 43.92 मीटर था, जो 16 अगस्त, 2021 को दर्ज किए गए उच्चतम जलस्तर 43.73 मीटर से 0.19 मीटर अधिक है। दानापुर में गंगा का जलस्तर 52.63 मीटर दर्ज किया गया, जो 15 अगस्त, 2021 को दर्ज किए गए उच्चतम जलस्तर 52.61 मीटर से 0.02 मीटर अधिक है।
पुनपुन नदी तक से घबराए लोग
इसी बीच, बांका घाट पर जलस्तर 49.47 मीटर था, जो 16 अगस्त, 2021 को दर्ज किए गए अधिकतम जलस्तर (एचएफएल) 49.44 मीटर से 0.03 मीटर अधिक है। राज्य में कई अन्य स्थानों पर भी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक नदी दुमरिया घाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, और बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा, गंगा नदी दीघा, हथीडा, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, बागमती नदी बेनीबाद में, और घाघरा नदी दरौली और गंगपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
बाढ़ प्रभावितों के लिए 109 सामुदायिक रसोईघर
उधर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 190 सामुदायिक रसोईघर संचालित किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 25 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, तीन राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जहां 1631 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा देखभाल सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों को लगभग 65,700 पॉलीथीन शीट और 12,700 सूखे राशन के पैकेट वितरित किए हैं।
लखीसराय में तीन नदियों ने कहर बरपाया
लखीसराय में गंगा और उसकी सहायक नदियां, हरुहर और किउल नदियां उफान पर हैं। जिले के लखीसराय, बरहिया, सूर्यगढ़ा और पिपरैया ब्लॉकों की लगभग 17 पंचायतें बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हैं। फसलें, विशेष रूप से दियारा क्षेत्र में, जलमग्न हो गई हैं और लोगों के घरों में पानी घुस गया है। लोग जलमग्न हो गए हैं और पशुपालकों को चारे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नावों की सुविधा न होने के कारण, लोगों को आवागमन के लिए पानी में चलना पड़ रहा है। बरहिया के खुथा गांव के निवासियों का कहना है कि उन्हें जिला प्रशासन से कोई सहायता नहीं मिली है और कोई भी अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है।
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भागलपुर में शहर की सड़कों के बराबर गंगा नदी
भागलपुर में बाढ़ का असर सिर्फ गांवों या दियारा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। इससे शहर में भी भारी परेशानी हो रही है। गंगा नदी के किनारे बसे कई मोहल्लों के मुहाने तक पानी पहुंच गया है। आदमपुर के मानिक सरकार मोहल्ले के निवासियों को डर के मारे अपने घर खाली करने पर मजबूर होना पड़ा है। तिलका मांझी विश्वविद्यालय कई दिनों से बाढ़ की चपेट में है। प्रशासनिक भवन से लेकर सीनेट हॉल तक, सब कुछ पानी में डूबा हुआ है, जिससे पढ़ाई और अन्य महत्वपूर्ण कार्य बाधित हो रहे हैं।

नावों की भी ली जा रही मदद
लोगों की निकासी और आवागमन में सहायता के लिए 1,429 नौकाओं का संचालन किया जा रहा है। प्रशासन नदियों के जल प्रवाह पर भी कड़ी नजर रख रहा है। रविवार शाम 5 बजे वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी का जल प्रवाह 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इस वर्ष 14 जुलाई को यहां अधिकतम जल प्रवाह 2,24,000 क्यूसेक दर्ज किया गया था। वीरपुर बैराज पर कोसी नदी का जल प्रवाह शाम 5 बजे 2,20,025 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसमें वृद्धि देखी जा रही है। इस वर्ष 20 जुलाई को यहां अधिकतम जल प्रवाह 2,55,425 क्यूसेक दर्ज किया गया था।
NDRF और SDRF की टीम भी तैनात
इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का जल प्रवाह 180,384 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इस वर्ष 2 सितंबर को उच्चतम जल प्रवाह 563,654 क्यूसेक दर्ज किया गया था। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए, राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विभिन्न जिलों में 27 एसडीआरएफ और 10 एनडीआरएफ टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहा है। (एजेंसी)

