सफाई में फंसे विधायक जी! रामेश्वर शर्मा बोले—’इस्लामाबाद का काजी कैंप’, कांग्रेस ने गूगल मैप खोलकर पूछा—कहां है ये मोहल्ला?
भोपाल। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक रामेश्वर शर्मा के एक ताजा बयान ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक माहौल में तनाव पैदा कर दिया है। जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच से दिया गया उनका एक विवादित बयान सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। बयान सामने आते ही कांग्रेस ने इसे एक समुदाय विशेष और इलाके को लक्षित कर ध्रुवीकरण की कोशिश बताया है, जबकि विधायक द्वारा दी गई सफाई पर भी विपक्षी नेताओं ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या था विधायक का विवादित बयान?
सार्वजनिक मंच से जनता को संबोधित करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने रक्षा क्षेत्र में देश की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “जब हिंदुस्तान के लोग कहते थे कि हम सुई बनाना भी नहीं जानते, तब मोदी जी ने कहा कि हम मिसाइल बनाएंगे।” लेकिन इसके तुरंत बाद वे स्थानीय संदर्भ जोड़ते हुए कह गए, “करोंद के चौराहे पर मिसाइल लगा दो और काजी कैंप पर गिरा दो।” इस वाक्य का वीडियो सामने आते ही राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में राजनीतिक पारा चढ़ गया।
‘इस्लामाबाद’ वाली सफाई पर कांग्रेस का गूगल सर्च से जवाब
बयान पर चौतरफा विरोध शुरू होने के बाद विधायक ने डैमेज कंट्रोल करते हुए स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने दावा किया कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की तरफ नहीं था, बल्कि वे पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित कथित काजी कैंप का जिक्र कर रहे थे।
विधायक के इस दावे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक अब्बास हाफिज ने पलटवार करते हुए इसे पूरी तरह भ्रामक बताया। अब्बास हाफिज ने कहा कि इंटरनेट और गूगल मैप्स पर व्यापक खोज के बावजूद इस्लामाबाद या पूरे पाकिस्तान में ‘काजी कैंप’ नाम की किसी जगह या इलाके का अस्तित्व नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने भोपाल के मुस्लिम बहुल क्षेत्र को सीधा निशाना बनाया और पकड़े जाने पर झूठी दलील पेश कर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार से इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
त्योहारी सीजन में ध्रुवीकरण का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि त्योहारों और चुनावी समीकरणों के मद्देनजर जानबूझकर ऐसा माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है जिससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़े। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल बीजेपी संगठन और प्रशासनिक हलकों ने चुप्पी साध रखी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बढ़ते राजनीतिक विवाद पर सरकार और पार्टी नेतृत्व क्या कदम उठाता है।

