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ट्रंप का अल्टीमेटम: नतांज के बाद अब पिकएक्स की पहाड़ियों को राख करने का प्लान, परमाणु जिद पर ईरान को आखिरी चेतावनी!

डेस्क। ईरान पर रणनीतिक दबाव और सैन्य कार्रवाइयों को तेज करते हुए अमेरिका ने एक बार फिर तेहरान को दो टूक चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं बनने देगा। सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले ‘पिकएक्स माउंटेन’ स्थित यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर अमेरिका की कड़ी निगरानी बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि इस भूमिगत केंद्र पर कोई भी संदिग्ध गतिविधि सामने आई, तो अमेरिकी सेना तत्काल और विनाशकारी हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

5 महीने के सैन्य अभियान का बचाव, परमाणु प्रसार रोकने का दावा

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बीते कई महीनों से जारी व्यापक सैन्य अभियानों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन और सेना का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “हम इस अभियान के पांचवें महीने में हैं और हमने यह सुनिश्चित किया है कि वे कभी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र नहीं बन सकें।”

‘कौन अंदर जा रहा है, हमें सब पता है’: ट्रंप का अल्टीमेटम

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के पिकएक्स पहाड़ी क्षेत्र में चल रही गतिविधियों पर सख्त निगरानी का दावा करते हुए कहा कि अमेरिकी खुफिया तंत्र की नजर पूरे इलाके पर है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “पिकएक्स माउंटेन पर कौन आ रहा है और कौन जा रहा है, हम हर गतिविधि और हर चेहरे से वाकिफ हैं। पूरे ईरान में किसकी क्या हलचल है, इस पर हमारी पैनी नजर है। यदि वहां कुछ भी प्रतिकूल या संदिग्ध पाया गया, तो हम उन पर जोरदार प्रहार करेंगे और हमला करने में तनिक भी देर नहीं लगाएंगे।”

नतांज के पास भूमिगत सुरंगों में छिपा परमाणु कार्यक्रम

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, पिकएक्स माउंटेन ईरान के पूर्व में क्षतिग्रस्त हो चुके नतांज (Natanz) यूरेनियम संवर्धन केंद्र के समीप स्थित है। रणनीतिक आकलन बताते हैं कि ईरान ने विदेशी हवाई और मिसाइल हमलों से बचने के लिए इस पहाड़ी के नीचे जमीन की अत्यधिक गहराई में दो मजबूत सुरंगें और बंकर तैयार किए हैं। पारंपरिक तौर पर परमाणु गतिविधियों को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे ही दुर्गम और बख्तरबंद पहाड़ी ढांचों का चयन किया जाता है, जिन पर अब अमेरिकी हमले का सीधा खतरा मंडरा रहा है।

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