रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक, परीक्षा से 2 घंटे पहले WhatsApp पर पहुंचा प्रश्नपत्र
Raipur Paper Leak Scandal: छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के एंटोमोलॉजी पेप की एक तस्वीर परीक्षा शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले WhatsApp के माध्यम से छात्रों तक पहुंच गई। शिकायतों के बावजूद परीक्षा आयोजित की गई। बाद में प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि होने पर विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर दी।
रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ((IGKV) में बीएससी कृषि कीट विज्ञान द्वितीय वर्ष की परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतों के बाद रद्द कर दी गई है। खबरों के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले प्रश्नपत्र की एक तस्वीर WhatsApp के माध्यम से कुछ छात्रों तक पहुंच गई थी। माना जा रहा है कि प्रश्नपत्र किसी अन्य स्रोत से भेजा गया था और छात्रों तक पहुंच गया था।
सुबह 8 बजे मिली शिकायत, फिर भी हुई परीक्षा
खबरों के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन को सुबह करीब 8 बजे ईमेल के जरिए प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत मिली। इसके बावजूद, परीक्षा निर्धारित समय पर ही आयोजित करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली। फिर, करीब 10:30 बजे विश्वविद्यालय प्रशासन को पता चला कि प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो चुका था औरWhatsApp के जरिए छात्रों तक पहुंच गया था।
पुष्टि होने के बाद परीक्षा रद्द
प्रश्न पत्र लीक होने से विश्वविद्यालय प्रशासन हिल गया। मामले की जांच और प्रश्न पत्र की प्रामाणिकता की पुष्टि के बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय द्वारा जांच पूरी करने और आगे के निर्णय लेने के बाद परीक्षा की पुनर्निर्धारण तिथि के बारे में जानकारी दी जाएगी।
पेपर कहां से लीक हुआ? 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
मामले की तह तक जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति प्रश्न पत्र के स्रोत, छात्रों तक पहुंचने के तरीके और इस पूरे मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
NSUI ने भी उठाए सवाल
छात्र संगठन NSUI ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय के एनएसयूआई अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे का एक बयान सामने आया है। अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह पता लगाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र की तस्वीर WhatsApp तक कैसे पहुंची और शिकायत के बावजूद परीक्षा क्यों आयोजित की गई। (एजेंसी)

