5 बार के विधायक व ममता के करीबी नेता का संदिग्ध निधन! जानिए किस बात से दुखी थे आशीष बनर्जी?
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी रविवार तड़के बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित टीएमसी पार्टी दफ्तर में मृत पाए गए। उनका शव दफ्तर के अंदर पंखे से लटकता हुआ मिला, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। 74 वर्षीय आशीष बनर्जी ममता सरकार में मंत्री रहने के साथ-साथ रामपुरहाट से 5 बार विधायक रह चुके थे।
सुसाइड नोट का दर्द: “मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं”
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को शव के पास से एक पन्ने का बेहद भावुक सुसाइड नोट मिला है।
राजनीतिक दरकिनार का आरोप: आशीष बनर्जी ने अपने आखिरी खत में लिखा कि उनकी मौत के लिए कोई व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है, लेकिन उन्हें अहसास हो चुका है कि राजनीति में आना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।
साजिशों का जिक्र: उन्होंने नोट में लिखा कि तारापीठ रामपुरहाट विकास प्राधिकरण से उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने और उनकी छवि खराब करने की साजिशें रची जा रही थीं।
अगली पीढ़ी को नसीहत: टीएमसी के दिग्गज नेता ने अपने परिवार और आने वाली पीढ़ियों को राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी है।
प्रोफेसर से कैबिनेट मंत्री और डिप्टी स्पीकर तक का सफर
आशीष बनर्जी टीएमसी के काफी पढ़े-लिखे और जनप्रिय नेताओं में शुमार थे। रामपुरहाट कॉलेज में असोसिएट प्रोफेसर रहे डॉ. आशीष बनर्जी बर्दवान यूनिवर्सिटी से पीएचडी धारक थे।
ममता बनर्जी के नेतृत्व में वे राज्य के शिक्षा और कृषि मंत्री रहे। इसके बाद जुलाई 2021 से मई 2026 तक उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा के 13वें डिप्टी स्पीकर के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
घटना की जानकारी मिलते ही उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ रामपुरहाट पार्टी ऑफिस के बाहर जमा हो गई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

