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अखिलेश यादव का नया राजनीतिक संदेश, बोले ‘PDA’ में ‘PD’ का अर्थ पंडित भी

Akhilesh Yadav News: बुधवार को समाजवादी चिंतक और संस्थापक नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती के मौके पर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक ऐसा राजनीतिक संदेश दिया जिसे उत्तर प्रदेश की बदलती सामाजिक और चुनावी राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘PDA’ में ‘PD’ का मतलब सिर्फ ‘पिछड़े’ (पिछड़े वर्ग) और ‘दलित’ ही नहीं, बल्कि ‘पंडित’ भी है।यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी लगातार अपने सामाजिक गठजोड़ का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में PDA रणनीति के जरिए पार्टी को मिली सफलता के बाद अब उसके दायरे को और व्यापक बनाने के संकेत इस बयान में दिखाई दिए।

जानिए PDA की बदलती परिभाषा के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश?

लोकसभा चुनाव से पहले, समाजवादी पार्टी ने ‘PDA’ का मतलब पिछड़े (पिछड़े वर्ग), दलित और अल्पसंख्यक बताया था। बाद में, पार्टी ने इस परिभाषा का दायरा बढ़ाते हुए इसमें आधी आबादी (महिलाएं), अग्रणी (सवर्ण जातियां) और पीड़ित (शोषित/दुखी लोग) को भी शामिल कर लिया। अब अखिलेश यादव ने कहा है कि PDA में ‘PD’ का मतलब पंडित (ब्राह्मण) भी है। उन्होंने तर्क दिया कि ब्राह्मण समुदाय भी लंबे समय से BJP सरकार के दौर में परेशान रहा है और इसलिए, वे भी PDA का हिस्सा हैं। पार्टी मुख्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर इस बयान का स्वागत किया।

ब्राह्मण समाज से जुड़े मामलों का भी किया जिक्र

अपने भाषण में, अखिलेश यादव ने कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राह्मण समुदाय के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने सितंबर 2023 में सुल्तानपुर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर घनश्याम तिवारी की हत्या का जिक्र किया। अखिलेश ने बताया कि उस घटना को लेकर ऐसे आरोप सामने आए थे कि डॉक्टर को ड्रिल मशीन से प्रताड़ित किया गया था। इसके अलावा उन्होंने विकास दुबे एनकाउंटर का भी उल्लेख किया। अखिलेश ने कहा कि वाहन पलटने की घटना को लेकर सभी जानते हैं कि क्या हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विकास दुबे जीवित रहता तो वह भाजपा सरकार के लिए असहज करने वाली बातें बता सकता था।

धार्मिक मामलों का भी उठाया मुद्दा

अपने भाषण में अखिलेश यादव ने उस घटना का भी जिक्र किया जब माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में पवित्र डुबकी लगाने से रोका गया था, और साथ ही बटुकों (युवा वैदिक छात्रों) को जिस अपमान का सामना करना पड़ा, उसका भी जिक्र किया। इन घटनाओं को उजागर करके उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि ब्राह्मण समुदाय से जुड़े धार्मिक मुद्दों को भी नजरअंदाज किया गया है।

जनेश्वर मिश्र की विरासत का किया उल्लेख

जनेश्वर मिश्र को याद करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा अपने ब्राह्मण नेताओं का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि ‘छोटे लोहिया’ के नाम पर बना पार्क इस बात का उदाहरण है कि पार्टी ने समाजवादी विचारधारा से जुड़े नेताओं का किस तरह सम्मान किया है।

राजनीतिक मायने

अखिलेश यादव के इस बयान को न सिर्फ ‘PDA’ की नई व्याख्या के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि इसे ब्राह्मण वोटरों तक एक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में PDA रणनीति की सफलता के बाद, समाजवादी पार्टी अब अपने सामाजिक गठबंधन को और व्यापक बनाने का संकेत देती दिख रही है। इसके अलावा, यह बयान BJP पर ब्राह्मण समुदाय की अनदेखी और उनके साथ बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाकर एक नई राजनीतिक कहानी गढ़ने की कोशिश को भी दर्शाता है।(एजेंसी)

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