राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को मिली 20 दिन की पैरोल
Asaram News: जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद 87 वर्षीय आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आसाराम बापू की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने उन्हें पहली बार 20 दिनों की पैरोल दी है। हालांकि, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने पैरोल का कड़ा विरोध करते हुए आशंका जताई थी कि रिहाई के बाद आसाराम फरार हो सकते हैं। लेकिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इन सभी आशंकाओं को पूरी तरह निराधार बताया।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने क्या कहा?
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पैरोल याचिका पर सुनवाई की। अपने आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि पैरोल से इनकार के समर्थन में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत तर्क और आशंकाएं किसी ठोस या मजबूत आधार सामने नहीं आया हैं। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि जोधपुर के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में हुई बैठक में आसाराम की 20 दिन की पैरोल याचिका पहले ही खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने अदालत के समक्ष जोरदार दलीलें पेश कीं।
जानिए क्या हैं राज्य सरकार और पुलिस के तर्क
पुलिस प्रशासन ने तर्क दिया कि आसाराम के रिहा होने के बाद भाग जाने की संभावना है। राजस्थान कैदी पैरोल रिहाई नियम, 1958 के नियम 14(क) का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राजस्थान के बाहर भी उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन्हें गुजरात के गांधीनगर की एक अदालत ने दोषी ठहराया जा चुका है।
सरकार ने भी तर्क दिया कि आसाराम का फिलहाल इलाज चल रहा है और किसी भी चिकित्सा अधिकारी ने उन्हें पैरोल के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ प्रमाणित नहीं किया है। इसके अलावा, पीड़ित परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
13 साल से अधिक समय जेल में बिताने का तर्क
मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद,हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आसाराम पहले ही 13 वर्ष, 1 माह और 24 दिन जेल में बिता चुके हैं। इस अवधि के दौरान उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी, लेकिन इस दौरान उनके द्वारा जमानत का दुरुपयोग करने, सामाजिक अशांति फैलाने या किसी गवाह को धमकाने या खतरे में डालने की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्थान में मिली सजा के संबंध में राज्य के पैरोल नियम ही प्रभावी होंगे, जबकि किसी अन्य राज्य में चल रही कानूनी प्रक्रियाएं वहां के कानूनों के अनुसार अपनी जगह जारी रहेंगी।
इन शर्तों पर मिली पैरोल
राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और 25 हजार रुपये के दो सक्षम जमानतों की शर्त पर 20 दिन की पैरोल दी है। गौरतलब है कि इसी साल 27 मई को राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने नाबालिग के साथ क्रूरता के मामले में आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। इसके बावजूद, लंबे समय से जेल में बंद रहने और पूर्व में अंतरिम राहत के दौरान अच्छे आचरण को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस बार 20 दिन की पैरोल याचिका को स्वीकार कर लिया है। (एजेंसी)

