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ED का बड़ा एक्शन! भाजपा नेता अशोक चांडक समेत कई ठिकानों पर छापेमारी

श्रीगंगानगर: राजस्थान के पटना में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने एक बड़ा अभियान चलाया। शुक्रवार तड़के करीब 5 बजे, केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने एक साथ जयपुर और श्री गंगानगर में भाजपा नेता और शराब कारोबारी अशोक चांडक के कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस अचानक कार्रवाई से हलचल मच गई। ईडी अधिकारियों ने उनके आवास, कार्यालय, व्यापारिक परिसर और चंद्रकला चैरिटेबल ट्रस्ट में दस्तावेजों की जांच की।

रिश्तेदारों के घरों पर भी चला सर्च ऑपरेशन

जांच का दायरा अशोक चांडक के निजी परिसर तक ही सीमित नहीं था। खबरों के मुताबिक, एजेंसी की टीमों ने श्री गंगानगर के निकुंज बिहार और जवाहर नगर में उनके रिश्तेदारों के घरों पर भी व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा, ईडी के अधिकारियों ने जयपुर के वैशाली नगर इलाके में चांडक परिवार के करीबी सहयोगियों के आवासों का भी दौरा किया और दस्तावेजों की जांच की।इस कार्रवाई में वित्तीय लेन-देन, प्रॉपर्टी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज और बिजनेस से जुड़े कई अहम रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच की गई।

आधिकारिक बयान का इंतजार

केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के एक कथित मामले से संबंधित मानी जा रही है। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय ने अभी तक छापेमारी और जब्त की गई वस्तुओं के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी या बयान जारी नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की पूरी जानकारी जांच पूरी होने और दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होगी।

बिहार में अवैध बालू खनन का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, बिहार के बांका जिले में महादेव एनक्लेव प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया गया। यह कंपनी श्री गंगानगर के चांडक परिवार की है। कंपनी का संचालन अशोक चांडक और उनके बेटे राघव चांडक करते हैं। जांच के दौरान, ईडी ने आईआईटी पटना से बांका जिले के नदी बेसिनों का भू-स्थानिक विश्लेषण कराया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2022-23 के बीच, कंपनी ने 131 करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित मूल्य का बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया।

ईडी ने गोपनीय ढंग से की कार्रवाई

ईडी की इस पूरी रेड की सबसे खास बात यह रही कि इसे बेहद गुप्त तरीके से अंजाम दिया गया। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूरे ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय रखा और स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी। स्थानीय प्रशासन के साथ कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई, जिससे छापे की गोपनीयता सुनिश्चित हुई और किसी को भी जांच की भनक नहीं लगी। (एजेंसी)

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