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मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 350 से अधिक शिक्षकों की सभी याचिकाएं खारिज

Supreme Court: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के विभिन्न मान्यता प्राप्त मदरसों में नियुक्तियों का दावा करने वाले 350 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों द्वारा दायर 40 से अधिक रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उनकी नियुक्तियां नियमित थीं और इसलिए वे राज्य सरकार की अनुदान सहायता योजना के तहत वेतन के हकदार हैं।

बता दें याचिकाकर्ताओं ने समिति के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके व्यक्तिगत दावों को खारिज कर दिया गया था। इस समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2023 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के बाद की गई नियुक्तियों की जांच के लिए किया था। जांच के बाद समिति ने सभी दावों को खारिज कर दिया।याचिकाओं पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं से सबसे मजबूत और प्रतिनिधि मामलों की पहचान करने को कहा। इसके बाद अदालत ने उन मामलों की विस्तार से जांच की।

अपना फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि अदालत ने 350 से अधिक याचिकाकर्ताओं में से 13 मामलों की पहले ही विस्तार से जांच की थी। यदि इन 13 में से किसी का भी दावा वैध पाया जाता, तो शेष मामलों पर विचार किया जाता। हालांकि, किसी भी याचिकाकर्ता का दावा राहत के योग्य नहीं पाया गया।

अपना फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि अदालत ने 350 से अधिक याचिकाकर्ताओं में से 13 मामलों की पहले ही विस्तार से जांच की थी। यदि इन 13 में से किसी का भी दावा वैध पाया जाता, तो शेष मामलों पर विचार किया जाता। हालांकि, किसी भी याचिकाकर्ता का दावा राहत के योग्य नहीं पाया गया। दरअसल, SC ने यह भी जांच की कि शिक्षकों की नियुक्ति के समय संबंधित मदरसों को वैध मान्यता प्राप्त थी या नहीं? क्या उनके प्रबंधन समितियों (मैनेजिंग कमेटियों) का गठन कानून के अनुरूप हुआ था।सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि प्रस्तुत किए गए प्रतिनिधि मामलों में से कोई भी राहत देने का आधार नहीं बनता है। न्यायालय ने सभी याचिकाओं को निराधार और योग्यताहीन मानते हुए खारिज कर दिया। परिणामस्वरूप, 350 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सभी दावे भी खारिज कर दिए गए।

जानिए क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 से संबंधित है। इस कानून के तहत मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए एक वैधानिक आयोग की स्थापना की गई थी। 2014 में, कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद, 2015 में, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस फैसले को बरकरार रखा। फिर, मार्च 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के इस फैसले पर रोक लगा दी।{(एजेंसी)

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