देवकी नंदन ठाकुर का बड़ा बयान: ‘गीता नहीं पढ़ने से हिंदू बच्चे ईमानदार नहीं’, सनातन बोर्ड और चरित्र शिक्षा की उठाई मांग
रायपुर। प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिक्षा, धर्म, लिव-इन रिलेशनशिप, सनातन बोर्ड और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू बच्चों को गीता का अध्ययन न कराने के कारण उनमें नैतिक शिक्षा की कमी देखने को मिल रही है, जबकि मुस्लिम और ईसाई बच्चे अपने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं।
‘गीता नहीं पढ़ने से बच्चे ईमानदार नहीं’
देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि मुस्लिम बच्चे कुरान और ईसाई बच्चे बाइबिल पढ़ते हैं, इसलिए उन्हें अपने धर्म की शिक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अपने बच्चों को गीता और महाभारत का ज्ञान नहीं दे रहा, बल्कि केवल पैसा कमाने की शिक्षा दे रहा है। उनके अनुसार नैतिक मूल्यों के विकास के लिए धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन जरूरी है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई चिंता
कथावाचक ने लिव-इन रिलेशनशिप पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ मामलों ने युवाओं को गलत दिशा में जाने का संकेत दिया है और समाज को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
संसद में धर्माचरित लोगों के लिए आरक्षण की मांग
देवकी नंदन ठाकुर ने संसद में धर्माचरित लोगों के लिए 50 सीटें आरक्षित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए ऐसे लोगों का सदन में पहुंचना जरूरी है। साथ ही उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप और अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय व्यक्त की।
स्कूलों में चरित्र शिक्षा पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की शिक्षा भी दी जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को बॉलीवुड गीतों पर नृत्य कराने की बजाय सीता, रानी लक्ष्मीबाई और सावित्री जैसे प्रेरणादायक चरित्रों से परिचित कराया जाए।
सनातन बोर्ड बनाने की मांग
देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि जिस तरह मदरसों को सरकारी सहायता मिलती है, उसी तरह गुरुकुलों और सनातन परंपरा से जुड़े संस्थानों को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के हित में सनातन बोर्ड के गठन की वकालत की।
राम मंदिर मामले पर भी की टिप्पणी
राम मंदिर चढ़ावा मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री मौन हैं तो संभव है कि वह भविष्य में कोई बड़ा कदम उठाने वाले हों। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत अनुमान है।

