भारत में लॉन्च हुआ पहला सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन, डायबिटीज मरीजों को बड़ी राहत
नोवो नॉर्डिस्क ने Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) किया लॉन्च, अब रोजाना की जगह साल में केवल 52 इंजेक्शन, कीमत भी बताई गई
New Delhi. डेनमार्क की प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार यह देश का पहला सप्ताह में केवल एक बार दिया जाने वाला बेसल इंसुलिन है, जिसे टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए विकसित किया गया है। इस नई दवा के आने से लाखों मरीजों को रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और पूरे साल में केवल 52 इंजेक्शन लेने होंगे।
डायबिटीज के इलाज में इंसुलिन थेरेपी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन रोजाना इंजेक्शन लगाने की जरूरत के कारण कई मरीज समय पर इलाज शुरू नहीं कर पाते। नोवो नॉर्डिस्क का कहना है कि इंजेक्शन का डर, असुविधा और लंबे समय तक दवा लेने की झिझक के कारण कई मरीज इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में 7 से 9 साल तक की देरी कर देते हैं। Awiqli का उद्देश्य इस समस्या को कम करना, मरीजों के लिए उपचार को अधिक सुविधाजनक बनाना और दवा नियमित रूप से लेने की आदत को बढ़ावा देना है।
कंपनी ने Awiqli को दो अलग-अलग FlexTouch पेन वेरिएंट में बाजार में उतारा है। पहला 1 मिलीलीटर (700 यूनिट) FlexTouch पेन है, जिसकी कीमत 2,611 रुपये रखी गई है। दूसरा 3 मिलीलीटर (2,100 यूनिट) FlexTouch पेन है, जिसकी कीमत 7,833 रुपये है।
कंपनी के अनुसार 700 यूनिट वाले पेन की प्रति यूनिट लागत लगभग 3.73 रुपये पड़ती है। यदि किसी मरीज को प्रतिदिन 10 यूनिट बेसल इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो उसे सप्ताह में 70 यूनिट की खुराक लेनी होगी, जिस पर लगभग 261 रुपये का खर्च आएगा। नोवो नॉर्डिस्क का दावा है कि यह मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक किफायती विकल्प साबित हो सकता है।
कंपनी ने अपने क्लिनिकल ट्रायल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ONWARDS-1 क्लिनिकल प्रोग्राम में Awiqli ने दैनिक इंसुलिन ग्लार्जिन U100 की तुलना में बेहतर परिणाम दिए। अध्ययन के अनुसार यह दवा HbA1c के स्तर को कम करने और ब्लड शुगर को लक्ष्य सीमा में बनाए रखने में प्रभावी रही। कंपनी का दावा है कि टाइप-2 डायबिटीज के अधिक मरीज बिना गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के HbA1c को 7 प्रतिशत से नीचे लाने में सफल रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सप्ताह में केवल एक बार इंसुलिन लेने की सुविधा मरीजों के लिए इलाज को आसान बना सकती है। इससे दवा समय पर लेने की संभावना बढ़ेगी और लंबे समय तक उपचार जारी रखना भी अपेक्षाकृत सरल हो सकता है। हालांकि किसी भी मरीज को नई इंसुलिन थेरेपी शुरू करने या बदलने का निर्णय केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में 10.1 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं, जबकि लगभग 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। इसके अलावा 9 लाख से अधिक टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए इंसुलिन जीवनभर का प्रमुख उपचार है। वहीं टाइप-2 डायबिटीज के लगभग 10 प्रतिशत मरीजों को भी बीमारी के एक चरण में इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है।
ऐसे में Awiqli जैसी नई तकनीक मरीजों के लिए उपचार को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि यह दवा किस मरीज के लिए उपयुक्त होगी, इसकी खुराक कितनी होगी और कब शुरू करनी है, इसका निर्णय केवल योग्य चिकित्सक की सलाह के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।

