पद्म विभूषण तीजन बाई के नाम पर राज्य अलंकरण, गनियारी में बनेगा कला केंद्र और तंबूरा संग्रहालय
Teejan Bai News: रायपुर: पद्म विभूषण तीजन बाई की विरासत को संरक्षित और प्रसारित करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की गई है, जिन्होंने पांडवनी को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। राज्य सरकार ने उनकी कला, संघर्ष और योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। संस्कृति विभाग ने बुधवार को खुले मंच पर “अमर रहेगी विरासत” नामक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया।
तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं
तीजन बाई की विरासत को संरक्षित करने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं।जिसमें तीजन बाई के नाम से राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू किए जाने पैतृक गांव गनियारी को कला केंद्र के रूप में विकसित करना और महंत घासीदास संग्रहालय में उनके तंबूरे का संरक्षण करना। इन पहलों का उद्देश्य पांडवनी की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। समारोह में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि अब तीजन बाई के नाम से राज्य अलंकरण पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिससे लोक एवं पारंपरिक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि तीजन में विकसित किया जाएगा। तीजन बाई के पैतृक गांव को कला केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
1 राज्य अलंकरण से लोक कलाकारों को मिलेगी नई पहचान
तीजन बाई के नाम पर राज्य अलंकरण की शुरुआत से पांडवनी और अन्य लोक कलाओं से जुड़े कलाकारों को एक प्रतिष्ठित मंच प्राप्त होगा। इससे लोक कलाकारों के योगदान को औपचारिक मान्यता मिलेगी और नई पीढ़ी को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। यह सम्मान न केवल छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को एक नई राष्ट्रीय पहचान देगा, बल्कि कलाकारों का मनोबल भी बढ़ाएगा।
2 गनियारी कला केंद्र बनेगा, परंपरा से जुड़ेगी नई पीढ़ी
इसे एक केंद्र के रूप में विकसित करने से पांडवनी और अन्य लोक कलाओं के प्रशिक्षण, अनुसंधान और संरक्षण के लिए एक नया मंच मिलेगा। यहां नियमित कार्यशालाएं, प्रशिक्षण शिविर और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इससे यह गांव न केवल तीजन बाई की जन्मभूमि के रूप में स्थापित होगा, बल्कि लोक कलाकारों कीनई पीढ़ी तैयार करने वाले प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी पहचान बना सकेगा।
3 संग्रहालय में तंबूरा बनेगा संघर्ष और साधना
उत्कृष्टता का प्रतीक: महंत घासीदास संग्रहालय में तीजन बाई के तंबूरा का संरक्षण उनकी कलात्मक यात्रा की अमूल्य विरासत को संरक्षित करेगा। संग्रहालय में आने वाले छात्र, शोधकर्ता और पर्यटक इस तम्बूरा के माध्यम से पांडवनी की समृद्ध परंपरा और तीजन बाई के संघर्षों को करीब से जान सकेंगे। यह मात्र एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और वैश्विक पहचान का जीवंत प्रतीक बन जाएगा।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम गूंजती रही पंडवानी
श्रद्धांजलि कार्यक्रम “अमर रहेगी विरासत” दोपहर 2 बजे शुरू हुआ, जिसमें अतिथियों के संबोधन और पांडवनी प्रस्तुतियां शामिल थीं। कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुतियां देते हुए तीजन बाई की कलात्मक गतिविधियों और लोक संस्कृति में उनके योगदान को याद किया। इसमें साहित्यकार, कलाकार और कला प्रेमी मौजूद रहे। समारोह में पंडवानी गायिका पद्मश्री उषा बारले, सूफी गायक पद्मश्री भारती बंधु, लोक गायिका पद्मश्री ममता चंद्राकर, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक खरे, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन आदि मौजूद रहे। (एजेंसी)

