20 जुलाई से शुरू हो सकता है संसद का मॉनसून सत्र, कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
Parliament Monsoon session: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, चार सप्ताह के इस मानसून सत्र में संभवतः 19 बैठकें होंगी। इस बार संसद सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है। टीएमसी में फूट, छह शिवसेना (यूबीटी) सांसदों की बगावत और डीएमके तथा इंडिया ब्लॉक का अलग होना इस बार के सत्र में खास तौर पर ध्यान खीचेंगे। सत्र शुरू होने से पहले स्पीकर ओम बिरला, टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपी में विलय पर फैसला सुनाएंगे। वे छह शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के शिंदे शिवसेना में विलय पर भी फैसला लेंगे। इसके अलावा, यह भी तय किया जाएगा कि डीएमके और टीएमसी के बागी सांसद लोकसभा में अलग-अलग बैठेंगे या नहीं।
सरकार लाएगी कई अहम बिल
एनडीए सरकार द्वारा इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच चुकी एनडीए सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने के लिए प्रयासरत है। सरकार दो महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से संबंधित 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक भी पेश किए जाने की उम्मीद है। सरकार इस विधेयक में एक महत्वपूर्ण संशोधन भी कर सकती है, जिसे अप्रैल में खारिज कर दिया गया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का प्रावधान शामिल किया जा सकता है।
सत्र में दिखेगा TMC में बगावत का असर
यह मानसून सत्र भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों द्वारा पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में सीटें जीतने के बाद हो रहा है। पश्चिम बंगाल की जीत भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस राज्य में वह पहली बार सत्ता में आई है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाथा) के भीतर हुए विद्रोहों का असर भी आगामी सत्र में देखने को मिल सकता है।
TMC और शिवसेना सांसदों पर होना है फैसला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को तृणमूल के 20 सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की उस मांग पर फैसला लेना है, जिसमें उन्होंने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष इन दोनों मामलों में मानसूत्र शुरू होने से पहले निर्णय ले सकते हैं। राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के बाद सत्तापक्ष का संख्या बल और मजबूत हो गया है।

फिर महिला आरक्षण पर संविधान संशोधन बिल ला सकती है सरकार
पिछला सत्र सरकार के लिए निराशाजनक रहा क्योंकि लोकसभा और विधानसभाओं में 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में पारित नहीं हो सका। अब सरकार इस संविधान संशोधन विधेयक का नया मसौदा तैयार कर रही है और सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि करने की संभावना पर विचार कर रही है। जनसंख्या के आधार पर सीटों में वृद्धि का मुद्दा दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक दलों की प्रमुख चिंताओं में से एक रहा है।
पीएम, सीएम की कुर्सी छीनने वाला बिल भी आ सकता है
सरकार 130वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है, जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन से अधिक की कैद होने पर उनके पद से हटा दिया जाएगा। माना जा रहा है कि जेपीसी कुछ महत्वपूर्ण संशोधन सुझा सकती है, जिनमें उन कानूनों का स्पष्ट उल्लेख शामिल है जिनके तहत दोष सिद्ध होने पर पद से हटाया जा सकता है। जेपीसी कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी प्रावधानों की सिफारिश कर सकती है।एक देश एक चुनाव के बिल को भी सरकार पारित कराने पर दे सकती है जोर। इनके अलावा सरकार एफसीआरए बिल, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एंटी डोपिंग बिल ला सकती है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के अध्यादेश के बदले विधेयक, कोड ऑन वेजेस सेंट्रल रूल्स, कॉर्पोरेट लॉ, सिक्यूरिटीज मार्केट कोड जैसे बिल भी लाए जा सकते हैं। विपक्ष देशभर में मॉनसून की कमी से सूखे और कुछ जगहों पर अधिक बारिश से बाढ़ के हालात पर चर्चा की मांग कर सकता है।
विपक्ष सरकार को घेरेगी
इसके अलावा, विपक्ष NEET परीक्षा के नतीजों से जुड़े लीक, राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार पर हमला कर सकता है। क्षेत्रीय दलों में फूट और इस प्रक्रिया में सरकार की भूमिका को लेकर भी विपक्ष विशेष रूप से आक्रामक रुख अपना सकता है। विपक्ष मतदाता सूची संशोधन अभियान (SIR) को लेकर भी सरकार को चुनौती दे सकता है। वहीं, पश्चिम बंगाल और असम में जीत के बाद भाजपा का मनोबल बढ़ा है और वह कमजोर विपक्ष को निशाना बना सकती है। (एजेंसी)

