NEET-JEE का टेंशन होगा खत्म! एडमिशन में 12वीं बोर्ड के नंबरों को 50% वेटेज देने की तैयारी, बड़ा बदलाव जल्द
देश के लाखों छात्रों को NEET और JEE जैसी कठिन प्रवेश परीक्षाओं के भारी मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी कर रही है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, अब मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए तैयार होने वाली मेरिट लिस्ट में 12वीं बोर्ड परीक्षा के नंबरों को 50 फीसदी तक वेटेज (महत्व) देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो देश का पूरा एजुकेशन और एंट्रेंस सिस्टम बदल जाएगा और बोर्ड परीक्षाओं की अहमियत काफी बढ़ जाएगी।
क्यों पड़ी इस बड़े बदलाव की जरूरत?
हाल ही में देश में हुई पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षाओं की शुचिता पर उठे गंभीर सवालों के बीच यह कदम उठाया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में छात्र सिर्फ एक परीक्षा के भारी दबाव और तनाव से गुजरते हैं, जिसके कारण कई बार अप्रिय घटनाएं भी सामने आती हैं। इसके अलावा, छात्र स्कूल जाने के बजाय ‘डमी स्कूलों’ और भारी-भरकम फीस वाले कोचिंग सेंटरों पर निर्भर हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि बोर्ड के नंबरों को वेटेज देने से कोचिंग सेंटरों का एकाधिकार खत्म होगा और छात्रों पर से मानसिक दबाव कम होगा।
प्रस्ताव में शामिल हैं ये 4 बड़े सुधार
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) को एक उच्च पदस्थ सूत्र ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय कमेटी कई अहम बिंदुओं पर काम कर रही है:
- 50% बोर्ड वेटेज: एडमिशन या फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार करने में 12वीं बोर्ड के अंकों को आधा (50%) महत्व दिया जाए।
- सिलेबस का तालमेल: कोचिंग सेंटरों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रवेश परीक्षाओं के सिलेबस को स्कूल (NCERT) के सिलेबस के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा।
- परीक्षा के कई मौके: छात्रों को साल में परीक्षा देने के एक से ज्यादा मौके दिए जा सकते हैं, ताकि एक बार फेल होने पर उनका पूरा साल बर्बाद न हो।
- ऑन-डिमांड टेस्ट: धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था को कंप्यूटर आधारित ‘ऑन-डिमांड टेस्ट’ (जब छात्र तैयार हो, तब परीक्षा दे सके) की तरफ ले जाने की योजना है।
अभी क्या है व्यवस्था?
फिलहाल लागू व्यवस्था के तहत मेडिकल (MBBS/BDS) में प्रवेश के लिए केवल NEET और इंजीनियरिंग (IIT/NIT) में दाखिले के लिए JEE परीक्षा के स्कोर और कटऑफ को ही आधार माना जाता है। बोर्ड परीक्षा के नंबर केवल एक ‘पासिंग क्राइटेरिया’ या न्यूनतम योग्यता के तौर पर ही देखे जाते हैं। अब इसी पुराने ढर्रे को बदलने के लिए शिक्षा मंत्रालय की एक नौ सदस्यीय विशेष कमेटी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस कमेटी का गठन पिछले साल कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूलों के चलन को रोकने के लिए किया गया था।
गौरतलब है कि दक्षिण भारत के कई राज्य, विशेषकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय, लंबे समय से यह मांग उठाते रहे हैं कि नीट जैसी परीक्षाओं को हटाकर 12वीं के नंबरों के आधार पर ही मेडिकल में एडमिशन दिया जाना चाहिए। ऐसे में केंद्र सरकार का यह नया फॉर्मूला राज्यों की चिंताओं को दूर करने में भी कारगर साबित हो सकता है।

