गरियाबंद में ही 11 लाख पेड़ गायब! पूरे छत्तीसगढ़ का हिसाब लगाया जाए तो आंकड़ा कहां पहुंचेगा?
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र के नुकसान का मामला सामने आया है। इसरो (ISRO) के सैटेलाइट डेटा और ड्रोन सर्वेक्षण से पता चला है कि बीते 15 वर्षों में रिजर्व क्षेत्र के करीब 956 हेक्टेयर जंगल को साफ कर दिया गया। वन विभाग के अनुसार, इस दौरान लगभग 10 से 11 लाख पेड़ों की कटाई हुई है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे में सामने आई तस्वीर
वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुराने और नए सैटेलाइट चित्रों की तुलना की गई। इसके साथ ड्रोन सर्वे भी कराया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से जंगलों के बड़े हिस्से के समाप्त होने के प्रमाण मिले। जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर अतिक्रमण कर खेती और बसाहट विकसित की गई, जिसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया।
166 अतिक्रमणकारियों की पहचान
उदंती टाइगर प्रोजेक्ट के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 166 अतिक्रमणकारियों की पहचान की जा चुकी है। संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। वन विभाग का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भूजल स्तर में चिंताजनक गिरावट
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के तेजी से खत्म होने का असर स्थानीय जल स्रोतों पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे भविष्य में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। वन क्षेत्र कम होने से वर्षा जल के संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।
वन्यजीवों के सामने बढ़ा संकट
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि जंगलों के घटने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। इसका असर न केवल जैव विविधता पर पड़ रहा है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका भी पैदा हो गई है। इसके अलावा महानदी कैचमेंट क्षेत्र पर भी इस वन विनाश का प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है।
संरक्षण और कार्रवाई पर जोर
वन विभाग का कहना है कि रिजर्व क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध कटाई को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर वन क्षेत्र के संरक्षण और पुनर्स्थापन की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

