MP राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का उपवास प्रदर्शन; EC दफ्तर के बाहर टांगी RSS की ड्रेस
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। भोपाल में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया, जबकि यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा आरएसएस की वर्दी टांगने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
कांग्रेस ने फैसले को बताया लोकतंत्र पर हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी विरोध कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन अनुचित तरीके से निरस्त किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से की मुलाकात
मामले को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा और चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में के.सी. वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, अभिषेक मनु सिंघवी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। नेताओं ने आयोग से नामांकन रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
मीनाक्षी नटराजन ने संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं और विपक्षी दलों को केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से ही नहीं, बल्कि संस्थागत चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस का दावा- कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। पार्टी का तर्क है कि जिस शिकायत का हवाला दिया जा रहा है, उस पर किसी अदालत द्वारा अभी तक अंतिम रूप से आपराधिक मामला दर्ज नहीं माना गया है। इसी आधार पर पार्टी ने नामांकन निरस्त करने के फैसले को गलत बताया है।
सिंघवी ने फैसले को बताया कानूनी भ्रम
वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस वार्ता में कहा कि नामांकन रद्द करने का आधार तथ्यों की गलत व्याख्या है। उनके अनुसार जिस मामले का उल्लेख किया जा रहा है, वह कानून की दृष्टि में ऐसा आपराधिक प्रकरण नहीं है जिसे उम्मीदवार द्वारा अनिवार्य रूप से घोषित किया जाना आवश्यक हो।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया फैसले का समर्थन
दूसरी ओर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चुनाव अधिकारी के निर्णय को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह पाया गया कि उम्मीदवार द्वारा आवश्यक जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव अधिकारी ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लिया है तथा कांग्रेस को इस मामले में आत्ममंथन करना चाहिए।
राजनीतिक बहस तेज
नामांकन रद्द होने के बाद यह मामला अब चुनावी और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बता रही है, वहीं भाजपा इसे नियमों और कानून के अनुरूप लिया गया निर्णय बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

