CG विधानसभा में लखमा और CM साय के बीच गहमा-गहमी, कॉरपोरेट की दखल के आरोप
रायपुर में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में कॉर्पोरेट दखल के आरोप खारिज किए। सरकार ने विकास, पर्यटन, सिंचाई और माओवाद उन्मूलन पर प्रतिबद्धता दोहराई।
रायपुर। विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन बुधवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में कॉर्पोरेट की दखल को लेकर लगाए गए कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बार-बार यह आरोप लगाया जाता है कि बस्तर को कॉर्पोरेट घरानों को सौंपा जा रहा है, लेकिन यह आरोप पूरी तरह निराधार है। हम बस्तर में सिंचाई सुविधाएं बढ़ाना चाहते हैं, यहां खेती कराना चाहते हैं, पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। मुख्यमंत्री साय ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार की उपलब्धियों और नीतियों को रखते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार विशेषज्ञ सरकार के रूप में काम करती रही, जबकि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए कई दोषियों को जेल के पीछे पहुंचाया है। इसके पहले कोंटा के कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने कड़े तेवर दिखाए। अभिभाषण पर चर्चा कर कहा कि बस्तर में शांति का माहौल तो बन रहा है, लेकिन अबूझमाड़ के जंगल व पहाड़ों के भविष्य पर यहां के आदिवासी चिंतित हैं। जंगल व परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए।
माओवादियों के खिलाफ लड़ रहे निर्णायक लड़ाई- साय
- मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, सुरक्षा और विकास के त्रिस्तरीय संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। उन्हें विश्वास है कि 31 मार्च तक छत्तीसगढ़ को माओवाद से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
- उन्होंने कहा कि जहां पहले स्कूल जलाए जाते थे और हथियारों की फैक्ट्रियां संचालित होती थीं। आज बस्तर में स्कूल संचालित हो रहे हैं, अस्पताल खुल रहे हैं और लोगों को बेहतर उपचार मिल रहा है। पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। बस्तर पंडुम में इस वर्ष 54 हजार कलाकारों का पंजीयन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमाण है।

