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जम्मू-कश्मीर: सेना को दी जा रही नॉन-लीथल ट्रेनिंग, अब बिना गोला-बारूद के भी पस्त रहेंगे दुश्मन

भारतीय सेना अब अपने जवानों को गैर-घातक युद्ध तकनीकों में प्रशिक्षित कर रही है. इसका उद्देश्य गोला-बारूद खत्म होने पर भी दुश्मन का सामना करना है. 2020 की गलवान घाटी की घटना से मिली सीख के बाद यह विशेष प्रशिक्षण LoC पर दिया जा रहा है.

भारतीय सेना लगातार खुद को मजबूत करने में लगी हुई है. इसको लेकर एडवांस हथियारों के साथ-साथ स्पेशल ट्रेनिंग भी जवानों को दी जा रही है. भारतीय सेना अपने जवानों को अब हथियारों की ट्रेनिंग के साथ-साथ नॉन-लीथल (बिना घातक हथियारों वाली) ट्रेनिंग भी दे रही है. इसका उद्देश्य यह है कि यदि किसी ऑपरेशन के दौरान जवानों के पास गोला-बारूद खत्म हो जाए या उस समय हथियार उपलब्ध न हों, तब भी वे दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दे सकें.

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के इलाकों में यह विशेष प्रशिक्षण लगातार दिया जा रहा है. इसमें जवानों को क्लोज कॉम्बैट और नॉन-वेपन तकनीकों में एक्सपर्ट बनाया जा रहा है. इस प्रशिक्षण के पीछे 2020 की गलवान घाटी की घटना से मिली सीख भी अहम मानी जा रही है.

गलवान घाटी में साल 2020 के समय भारतीय सेना के जवानों ने बिना पारंपरिक हथियारों के भी चीनी PLA सैनिकों का मजबूती से मुकाबला किया था. इसके साथ ही उस समय चीनी सैनिकों को आगे बढ़ने से रोका था. उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब जवानों की तैयारी को और मजबूत किया जा रहा है.

किस-किस तरह की दी जा रही ट्रेनिंग?

ट्रेनिंग के दौरान जवानों को बॉक्सिंग, कराटे, लाठी का उपयोग, बंदूक की बट से वार करना, चाकू का इस्तेमाल और अन्य क्लोज कॉम्बैट तकनीकों का अभ्यास कराया जा रहा है. मकसद साफ है, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, भारतीय सैनिक हर हाल में दुश्मन पर भारी पड़ें और देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें.

सेना लगातार खुद को कर रही मजबूत

सेना की तरफ से लगातार खुद को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अब तक कई एडवांस हथियार सेना में शामिल किए गए हैं. इसके साथ ही कई हथियारों को शामिल करने की तैयारी चल रही है. इससे आने वाले दिनों में सेना को और भी ज्यादा मजबूती मिलेगी. ऐसा होने से सेना हर स्थिति में दुश्मनों का सामना करने में सफल रहेगी.

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