Sun. Jan 11th, 2026

भारत में दिखा साल 2026 का पहला ‘सुपरमून’, जानें इसे क्यों कहते हैं ‘वुल्फ मून’

आज की रात भारत में भी सुपरमून दिखाई दिया है, इस दौरान चांद अधिक बड़ा और चमकीला दिखाई देता है। देश के कई शहरों में आप आज रात आसमान में चांद का दीदार कर सकते हैं। जानते हैं इसे वुल्फ मून क्यों कहते हैं?

भारत में भी साल 2026 का पहला ‘सुपरमून’, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘वुल्फ मून’ के नाम से जाना जाता है, देखा गया। इस खगोलीय घटना के दौरान, चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में 30% अधिक चमकीला दिखाई देगा। आपने देखा क्या…अगर नहीं देखा तो आज के चांद का दीदार जरूर कीजिए। आज यानी शनिवार की आधी रात के आसपास आपके सिर के ऊपर यह चमकेगा और  इसके पास ही एक चमकीला तारा नजर आएगा, जो बृहस्पति होगा। इस दिन नजर आने वाला चंद्रमा पेरिगी पर स्थित होता है, जिसका मतलब चंद्रमा की कक्षा में वह बिंदु जो पृथ्वी के सबसे करीब होता है।

सुपरमून को क्यों कहते हैं वुल्फ मून

खगोलीय भाषा में इसे सुपर वुल्फ मून भी कहते हैं। सुपरमून जिसे ‘वुल्फ मून’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी वजह ये है कि जनवरी में कड़ाके की ठंड के दौरान पहले के दिनों में उत्तरी गोलार्ध में भेड़ियों के झुंड की आवाज अधिक सुनाई देती थी और इसी वजह से इस दिन होने वाले पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा गया। यह नाम उत्तरी गोलार्ध की प्राचीन लोककथाओं से जुड़ा है। आज का वुल्फ मून खास इसलिए है क्योंकि इस समय धरती सूर्य के करीब होती है, जिसके कारण चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी और ज्यादा स्पष्ट हो जाती है और यही सुपरमून कहलाता है।

सुपरमून क्यों होता है खास?

सामान्य दिनों में सूर्य पृथ्वी से लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर दूर होता है लेकिन जब सुपरमून होता है तब सूर्य भी पृथ्वी के करीब होता है और पूर्णिमा का चांद धरती के सबसे नजदीकी बिंदु, जिसे पेरिजी कहा जाता है उसके आसपास होता है। बता दें कि चांद का ओरबिट पूरी तरह गोल नहीं बल्कि अंडाकार होती है, इसलिए उसकी धरती से दूरी समय-समय पर बदलती रहती है और जब चंद्रमा धरती के करीब होता है, तब वह आकार में बड़ा और रोशनी में ज्यादा तेज नजर आता है। हालांकि यह अंतर आंखों से बहुत ज्यादा स्पष्ट न लगे, लेकिन चमक आपको महसूस होगी।

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