Tue. Mar 31st, 2026

Raipur News : ये फाउंडेशन दे रहा असहाय लोगों को सहारा, अब तक 211 लोगों को परिजनों से मिलवाया

Raipur News:

Raipur News: शकुंतला गोपाल फाउंडेशन राजधानी रायपुर से लगे ग्राम गोढ़ी अपना घर आश्रम नाम से आश्रम चला रहा है। जहां बिछड़ों को मिलाने का काम किया जा रहा है।

Raipur News रायपुर। शकुंतला गोपाल फाउंडेशन द्वारा गोढ़ी में निर्मित गंगा सेवा सदन में 14 माह में 211 लोगों को लाया गया। जो या तो मानसिक तौर पर बीमार थे,या लावरिस, असहाय थे। सदन में सेवा- चिकित्सा उपरांत 87 से लोगों का पुनर्वास किया गया। यानी परिवार या रिश्तेदारों से मिलवाया गया।

राजधानी रायपुर से लगे ग्राम गोढ़ी अपना घर आश्रम नाम से एक आश्रम शकुंतला गोपाल फाउंडेशन चला रहा है। जिसके संस्थापक गोपाल अग्रवाल बताते हैं कि अगस्त में राज्य सरकार की मदद से ऐसा आश्रम प्रदेश भर में चलायेगे। फिलहाल ग्राम गोढ़ी में फाउंडेशन अपने खर्चे पर आश्रम चला रहा है।

जहां 14 माह के भीतर इस वक्त 211 लावारिस, असहाय, लाचार, मानसिक रूप से पीड़ित, मूक- बधिर आदि लोगों को लाया गया। ऐसे लोग जिन्होंने अपनों के मिलने की उम्मीद खो दी थी। उन्हें भी अपना घर आश्रम में खुशी मिल रही है। उक्त 211 में से 87 लोगों को उनके परिवार, रिश्तेदारों से मिलवाया गया। 11 अन्य को दूसरे आश्रम में ट्रांसफर किया गया। इस वक्त 101 लोग अपना आश्रम में है।

इस आश्रम में लाए गए लोगों को प्रभु जी पुकारा जाता है। इनकी ऐसी सेवा की जाती है, जो अपने भी ना करें। बाहर से लाए जाने पर सबसे पहले नहला-धुलाकर बाल ,नाखून काटे जाते हैं फिर साफ-सुथरा कपड़ा पहनाया जाता है। दवा खाना आदि पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जो असहाय होते हैं उन्हें अपने हाथों से भोजन कराया जाता है।

अग्रवाल सेवा भावना ऐसी है कि भाषा का बंधन टूट रहा है। कुछ दक्षिण भारतीय हैं उनकी भाषा समझने के लिए दक्षिण भारतीय लोगों से मदद ली जाती है। जिससे उनके परिवार वालों के बारे में जानकारी मिलती है। आश्रम में कुछ मूक -बधिर लोगों को लाया गया है। जिनकी मदद या भावों को समझने के लिए गोपाल वाणी संस्था के शिक्षकों की मदद ली जाती है। फाउंडेशन पूरा ध्यान रखना है कि सेवा कार्य में किसी तरह की कमी न रह जाए। आश्रम में रहकर स्वस्थ होने के बाद लोग अपने घर-परिवार जानकारी देते है तो आश्रम संपर्क कर परिवार से मिलन कराता है। मिलन का अवसर बड़ा भावुक होता है। कई अपने बिछड़े परिवार के मिल जाने से ख़ुशी से झूम उठते हैं।

(डा. लेखक विजय)

About The Author